लाडली बहना पर सवाल: अपात्र नाम बने सिरदर्द, सरकार कर सकती है छंटनी.
Questions on Ladli Behna: Ineligible Names Become a Headache, Government May Trim the List.
Special Correspondent, Bhopal, MP Samwad.
The Madhya Pradesh government is considering auditing beneficiaries of the Ladli Behna Yojana after complaints of ineligible names benefiting. The audit may be completed before the monthly incentive rises from ₹1,250 to ₹1,500 post-Diwali. CM Mohan Yadav confirmed phased hikes, while opposition questions transparency in the scheme.
मध्य प्रदेश सरकार लाड़ली बहना योजना में अपात्र नामों की शिकायतों के बाद लाभार्थियों का ऑडिट कराने पर विचार कर रही है। दिवाली के बाद राशि 1,250 से बढ़कर 1,500 रुपये होगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने चरणबद्ध बढ़ोतरी की घोषणा की, जबकि विपक्ष पारदर्शिता पर सवाल उठा रहा है।
MP संवाद, भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार की बहुचर्चित लाडली बहना योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सूत्रों के अनुसार, सरकार अब इस योजना में शामिल अपात्र नामों को हटाने के लिए ऑडिट कराने की तैयारी कर रही है। शिकायतें मिल रही थीं कि बड़ी संख्या में अपात्र लाभार्थी भी योजना का फायदा उठा रहे हैं।
1.26 करोड़ महिलाओं पर असर, ऑडिट के बाद छंटनी पक्की
फिलहाल योजना में 1.26 करोड़ महिलाएं जुड़ी हुई हैं। सरकार चाहती है कि अयोग्य लाभार्थी स्वेच्छा से योजना से बाहर हों, वरना जांच के बाद उन्हें हटाया जाएगा। ये कदम तब सामने आया है जब शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 9 सितंबर को खुद माना कि इस योजना में अपात्र लोग शामिल हैं।
भाई दूज पर तोहफ़ा – 1,250 से बढ़कर 1,500 रुपये
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घोषणा की है कि भाई दूज (23 अक्टूबर) से मासिक राशि को 250 रुपये बढ़ाकर 1,500 रुपये कर दिया जाएगा। हाल ही में सरकार ने 1.26 करोड़ महिलाओं के खातों में 1,541 करोड़ रुपये की 28वीं किस्त जारी की। अब तक इस योजना पर कुल 41,000 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।
चुनावी गेमचेंजर या फिजूलखर्ची?
योजना को चरणबद्ध तरीके से 3,000 रुपये प्रतिमाह तक बढ़ाने की बात कही जा रही है। यह वही योजना है जिसने भाजपा को 2023 विधानसभा चुनाव में सत्ता में बनाए रखा। लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह सिर्फ चुनावी हथकंडा है, असली मुद्दा है – अपात्र लाभार्थियों को शामिल करने की लापरवाही और भारी भ्रष्टाचार।
कांग्रेस से मुकाबले की रणनीति?
गौरतलब है कि पिछली शिवराज सिंह चौहान सरकार ने यह योजना 2023 के चुनाव से ठीक तीन महीने पहले शुरू की थी। यह कदम कांग्रेस के उस वादे के जवाब में था, जिसमें कमलनाथ ने महिलाओं को 1,000 रुपये प्रतिमाह देने की घोषणा की थी।
लाडली बहना योजना ने भाजपा को चुनावी सफलता तो दिलाई, लेकिन अपात्र लाभार्थियों का मुद्दा सरकार की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। दिवाली से पहले ऑडिट कितना गंभीर होगा, यह देखने वाली बात होगी।