ढाबे से किराने तक शराब—खंडवा में अवैध धंधे को किसका संरक्षण?
अवैध शराब के खिलाफ सड़क पर उतरीं खंडवा की महिलाएं, प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
From Dhabas to Grocery Shops — Who Is Protecting the Illegal Liquor Trade in Khandwa?
Special Correspondent, Richa Tiwari, Khandwa, MP Samwad News.
MP संवाद, खंडवा। जिले में शराब का अवैध कारोबार अब छिपा नहीं, बल्कि खुलेआम चुनौती बन चुका है। ढाबों से निकलकर शराब अब किराना दुकानों की अलमारियों तक पहुंच गई है, और प्रशासन की भूमिका मूकदर्शक से आगे नहीं बढ़ पा रही।
गांवों में हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि महिलाओं का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। शराब के नशे में गाली-गलौज, मारपीट और घरेलू हिंसा अब रोजमर्रा की कहानी बन चुकी है। सवाल यह है कि जब महिलाओं को यह सब साफ दिखाई दे रहा है, तो आबकारी और पुलिस को क्यों नहीं?
महिलाएं सड़क पर, अफसर फाइलों में
मंगलवार को दिवाल गांव सहित कई इलाकों की महिलाएं जब कलेक्टर कार्यालय पहुंचीं, तो उनका गुस्सा साफ झलक रहा था। यह कोई पहला प्रदर्शन नहीं था। एक महीने में दूसरी बार महिलाओं को सड़क पर उतरना पड़ा, लेकिन अब तक शराब माफियाओं पर नकेल नहीं कसी जा सकी।
‘लाडली बहना’ योजना पर भी नशे की मार
महिलाओं ने बड़ा सवाल उठाया—
“सरकार ₹1500 हमारी मदद के लिए देती है, लेकिन वही पैसा शराब में उड़ रहा है। फिर योजना का फायदा किसे मिल रहा है—महिलाओं को या शराब माफियाओं को?”
सवाल जो जवाब मांगते हैं
- क्या किराना दुकानों में शराब बिकना प्रशासन को दिखाई नहीं देता?
- क्या कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है?
- क्या शराब माफियाओं को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण मिला हुआ है?
अब चेतावनी है, निवेदन नहीं
महिलाओं ने साफ कहा कि अगर जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन और तेज होगा। शराब बेचने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और गांवों को शराब मुक्त घोषित करने की मांग अब चेतावनी का रूप ले चुकी है।
खंडवा की महिलाएं पूछ रही हैं—
“क्या सरकार हमारे घर बचाएगी या शराब माफिया यूं ही राज करता रहेगा?”
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