दस्तावेज बोलते हैं, लेकिन कटनी प्रशासन खामोश – माफियाओं की जीत?
Documents Speak, but Katni Administration Remains Silent – Victory for the Mafia?
Harishankar Parashar, Senior Correspondent, Katni, MP Samwad.
In Katni, powerful land mafias attempt to illegally capture the centuries-old public ‘Kuliya’ site despite documentary evidence proving it as community land. Locals submitted complaints with proof, yet the administration remains silent. Citizens fear losing their heritage while questions rise on governance, accountability, and the growing dominance of mafias.
MP संवाद, कटनी शहर के मालवीय गंज, गुरुनानक वार्ड और नसरवान वाड़ा क्षेत्र में दशकों पुराना सार्वजनिक निस्तार स्थल ‘कुलिया’ भू-माफियाओं की लालच का शिकार हो गया है। प्रभावशाली लोग खुलेआम बाउंड्री वॉल खड़ी कर कब्ज़े की कोशिश कर रहे हैं।
दस्तावेज़ मौजूद, कार्रवाई ग़ायब
स्थानीय लोगों के पास पुराने रिकॉर्ड और रजिस्ट्री दस्तावेज़ मौजूद हैं, जिनमें इस जगह को कुलिया के रूप में दर्ज किया गया है। इसके बावजूद निगम और प्रशासन चुप है। सवाल है – जब सबूत साफ हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं?
बार-बार कब्ज़े की कोशिश, जनता असहाय
पंकज आहूजा, हासा सहजवानी और धनेश माखीजा समेत अन्य लोगों ने छह महीने पहले भी यही कोशिश की थी। विरोध पर काम रुका, मगर 12 सितंबर को दोबारा मजदूर बुलाकर निर्माण शुरू कर दिया गया। नागरिक और अधिकारी पहुंचे तो काम रुकवाया गया, लेकिन माफियाओं के हौसले अब भी बुलंद हैं।
जनता की पुकार: क्या कानून मर चुका है?
क्षेत्र के निवासी दीपक गोगवानी, विजय अग्रवाल, नानक राम आलानी सहित दर्जनों लोगों ने कहा,
“हमारे पास सबूत हैं, लेकिन भू-माफियाओं के सामने प्रशासन चुप्पी साध लेता है। क्या अब गरीबों की ज़मीन हड़पना अपराध नहीं रहा?”
प्रशासन की नाकामी और बड़ा सवाल
यह घटना केवल एक ‘कुलिया’ की नहीं, बल्कि कटनी में भू-माफियाओं के बढ़ते आतंक और प्रशासनिक नाकामी का प्रतीक है। शिकायतें बार-बार भेजने के बावजूद कार्रवाई न होना इस बात का सबूत है कि प्रशासन केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित है।
नतीजा: कानून या माफिया-राज?
अगर अब भी ठोस कदम न उठाए गए तो न केवल यह सार्वजनिक धरोहर खत्म होगी, बल्कि शहर में कानून पर भू-माफियाओं का राज कायम हो जाएगा। अब यह मामला प्रशासन की परीक्षा है—क्या वे जनता के हक की रक्षा करेंगे या चुप्पी साधकर माफियाओं को खुली छूट देंगे?