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डीजीपी बनने की रेस में कैलाश मकवाना, प्रशासनिक टिप्पणी और अनुशंसा से हो जाएंगे बाहर

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Kailash Makwana in the race to become DGP, will be out of administrative comment and recommendation

  • पुलिस हाउसिंग कार्पोरेशन के चेयरमैन के सीआर का मामला 
  •  शासन को पत्र लिखने से स्पेशल डीजी के बढ़े एक नंबर

भोपाल। मध्य प्रदेश लोकायुक्त संगठन में विशेष स्थापना पुलिस के पूर्व प्रमुख रहे कैलाश मकवाना की लोकायुक्त द्वारा लिखी गई खराब सीआर के मामले में जब मकवाना ने राज्य शासन को रिव्यू के लिए लिखा तो तत्कालीन मुख्यमंत्री ने आईपीएस अधिकारी की सीआर में सुधार किया। हालांकि सिर्फ नंबर ही पूर्व सीएम बढ़ा सके। अब यह मामला इसलिए चर्चा में हैं क्योंकि मकवाना डीजीपी की रेस में हैं। ऐसे में उनकी सीआर में कम नंबर रेस से बाहर होने की आसार बना रही है। वहीं जानकारों का कहना है कि एक बार सीएम ने सीआर में सुधार किया है तो फिर दुबारा बदलाव की गुंजाइश नहीं होती है। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी 1988 बैच के कैलाश मकवाना की लोकायुक्त संगठन की विशेष पुलिस स्थापना में पोस्टिंग और लोकायुक्त जस्टिस एनके गुप्ता से उनके मतभेदों के बाद सवा साल पहले स्थानांतरण के बावजूद मकवाना-गुप्ता विवाद खत्म नहीं हुआ है। जस्टिस गुप्ता ने मकवाना की लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना में करीब छह महीने की पदस्थापना के दौरान उनके कामकाज को लेकर सीआर लिखी तो तबादले के बाद शांत पड़ा दोनों के बीच का विवाद फिर सुर्खियों में आ गया। 

 सूत्रों के मुताबिक मकवाना के तबादले के कुछ महीने बाद लोकायुक्त ने सीआर लिखी तो उसमें उनकी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए और नंबर देने में कंजूसी की। सीआर में दस में से पांच नंबर दिए गए। मकवाना को अपनी सीआर खराब किए जाने पर नाराजगी हुई और उन्होंने सलाह मशविरे के बाद सीआर के रिव्यू के लिए राज्य शासन को पत्र लिखा जिसमें जस्टिस गुप्ता द्वारा लिखी गई सीआर को दुर्भावनापूर्ण बताया। 

यह भी सही है कि लोकायुक्त ने सीआर में कम नंबर की वजह भी बताई। मकवाना ने एक पूर्व डीजी की आय से अधिक संपत्ति पर कार्रवाई नहीं करने की वजह भी दी। फिर लोकायुक्त से मकवाना हटे तो पूर्व डीजी के खिलाफ मामला भी दर्ज हुआ। 

सीआर की समीक्षा के बाद सुधार

 सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मकवाना ने राज्य शासन के सामान्य प्रशासन विभाग को लोकायुक्त जस्टिस गुप्ता द्वारा लिखी गई सीआर के रिव्यू के लिए लिखा तो मामला तत्कालीन सीएम के पास पहुंचा। उन्होंने मामले में सीआर का परीक्षण किया और सीआर में मकवाना को दिए गए नंबर पांच से बढ़ाकर छह कर दिए।

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