हर तीसरा गिलास ज़हर! MP में ‘जल जीवन मिशन’ की भयावह सच्चाई.
ग्रामीण मध्यप्रदेश में जल जीवन मिशन के तहत असुरक्षित पेयजल की भयावह तस्वीर
Every third glass is poison! The horrifying truth of the Jal Jeevan Mission in Madhya Pradesh.
Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद, भोपाल, मध्यप्रदेश में सरकार भले ही “हर घर जल” का ढोल पीट रही हो, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि गांवों में हर तीसरा गिलास पानी इंसान की जान के लिए खतरा बन चुका है।
जल जीवन मिशन की ताज़ा रिपोर्ट ने सरकार के दावों पर ऐसा तमाचा जड़ा है, जिसे आंकड़ों से भी छिपाया नहीं जा सकता।
राज्य के ग्रामीण इलाकों में 36.7% पेयजल नमूने असुरक्षित पाए गए। मतलब साफ है—सरकार पानी पहुंचाने में सफल हुई या नहीं, यह बहस का विषय हो सकता है, लेकिन ज़हरीला पानी पहुंचाने में वह पूरी तरह सफल रही है।
सबसे शर्मनाक स्थिति सरकारी अस्पतालों की है, जहां इलाज के नाम पर मरीजों को 88% मामलों में दूषित पानी पिलाया जा रहा है।
स्कूलों में बच्चे किताबों से पहले ज़हर से परिचित हो रहे हैं।
आदिवासी इलाकों में तो स्थिति और भयावह है—अनूपपुर और डिंडौरी में एक भी सुरक्षित सैंपल नहीं, यानी पूरा सिस्टम आदिवासियों की सेहत से सीधा खिलवाड़ कर रहा है।
सरकार ने पाइपलाइन को उपलब्धि और कवरेज को सफलता बता दिया, लेकिन यह भूल गई कि पानी पीने लायक भी होना चाहिए।
इंदौर जैसा “मॉडल शहर” जहां 100% कनेक्शन का दावा है, वहां भी दो-तिहाई लोग साफ पानी से वंचित हैं।
भागीरथपुरा की मौतें कोई हादसा नहीं, बल्कि नीति, निगरानी और नीयत की विफलता का नतीजा हैं।
हाईकोर्ट ने इसे जन स्वास्थ्य आपातकाल कहा है—अब सवाल यह है कि
क्या सरकार इसे भी आंकड़ों की फाइल में दफन कर देगी?