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ड्रग्स, डीजे और दलदल! जबलपुर के होटल बनते जा रहे नशे के गढ़.

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Illegal drug and liquor parties in Jabalpur hotels with DJs and minors while administration remains silent

Drugs, DJs, and Decay! Jabalpur’s Hotels Turning into Hubs of Intoxication.

Source- Revanchal Times, Edited by MP Samwad.

In the name of night shows, Jabalpur’s hotels and cafés are turning into drug hubs. From banned liquor to hard drugs and underage attendees, the law is openly violated. Despite viral promotions and ticket sales on social media, the administration remains silent. Is this negligence or hidden protection?

MP संवाद, जबलपुर। जब शहर गहरी नींद में होता है, तब जबलपुर के कुछ इलाकों में ‘नाइट शो’ के नाम पर नशे, अश्लीलता और कानून का खुला मजाक उड़ाया जाता हैगोरा बाजार, बिलहरी रोड और मंडला रोड के आसपास के होटल, कैफे और रेस्टोरेंट देर रात तक रेव पार्टीज और अवैध गतिविधियों के अड्डे बन चुके हैं।

इन आयोजनों में नियम-कायदों की धज्जियां उड़ाई जाती हैंड्रग्स की सप्लाई से लेकर प्रतिबंधित शराब, अश्लीलता और शोर-शराबे तक, हर चीज खुलेआम हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, इन पार्टियों में कोकीन, एलएसडी, चरस और गांजा जैसे मादक पदार्थ तक परोसे जा रहे हैं। नाबालिग और कॉलेज स्टूडेंट्स की मौजूदगी इस खतरे को और गंभीर बनाती है।

भीड़, खतरा और नियमों की उड़ती धज्जियां

जहां 100 लोगों की क्षमता होती है, वहां 400 से 500 लोगों को ठूंस-ठूंस कर रेव पार्टियों में शामिल किया जा रहा है। फायर सेफ्टी, एम्बुलेंस या आपातकालीन निकास जैसी कोई व्यवस्था नहीं होती। अगर कोई हादसा हो जाए तो जवाबदेही किसकी होगी?

सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों की वजह से रातभर ट्रैफिक जाम, एम्बुलेंस की आवाजाही में रुकावट और शहर की शांति भंग होना आम हो गया है।

क्या प्रशासन आंख मूंदे बैठा है?

इन आयोजनों की सूचना सोशल मीडिया पर खुलेआम प्रचारित होती है, टिकट खुले में बेचे जाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि नगर निगम, पुलिस, आबकारी विभाग और जिला प्रशासन को इनका पता क्यों नहीं चलता?
या फिर—क्या इन आयोजनों को किसी ‘अदृश्य संरक्षण’ का सहारा मिल रहा है?
क्या राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण इसके पीछे है?

कानून क्या कहते हैं?

IPC की धाराएं 268, 283, 336, 269, 270: यदि भीड़ से जान-माल को खतरा होता है, तो आयोजक और संचालक सीधे जिम्मेदार होते हैं।

MP आबकारी अधिनियम, 1915: सार्वजनिक स्थान पर अवैध शराब परोसना अपराध है।

NDPS Act, 1985: ड्रग्स का सेवन, बिक्री, खरीदी और सप्लाई दंडनीय अपराध है।

Noise Pollution Rules, 2000: रात 10 बजे के बाद डीजे और नाइट शो पूरी तरह प्रतिबंधित हैं।

FSSAI और Fire Norms: तय क्षमता से अधिक भीड़ और बिना सुरक्षा अनुमोदन कार्यक्रम अवैध हैं।

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