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फर्जी नर्सिंग कॉलेजों के छात्रों को मिलेगा नया मौका, हाईकोर्ट का आदेश.

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Official court order document symbolizing the transfer of thousands of students exposed to fake nursing colleges, as per the High Court’s directive.

Jabalpur High Court orders student transfer from fake nursing colleges in Madhya Pradesh.

Jabalpur High Court directs authorities to transfer students from fraudulent nursing colleges to eligible institutes within 30 days. CBI investigation ongoing.

Students of Fake Nursing Colleges to Get a New Chance, Orders High Court.

Special Correspondent, Jabalpur, MP Samwad.

MP जबलपुर हाईकोर्ट ने मध्य प्रदेश के फर्जी नर्सिंग घोटाले के मामले में सुनवाई करते हुए अपात्र कॉलेजों के छात्रों को पात्र संस्थानों में 30 दिन के भीतर स्थानांतरित करने के निर्देश दिए हैं। नर्सिंग फर्जीवाड़े मामले में लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल द्वारा दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की विशेष पीठ (जस्टिस संजय द्विवेदी और जस्टिस अचल कुमार पालीवाल) ने यह महत्वपूर्ण आदेश पारित किए।

हाईकोर्ट के पूर्व आदेश के अनुपालन में सरकार द्वारा अपात्र संस्थाओं की मान्यता और संबद्धता से संबंधित मूल फ़ाइलें पेश की गईं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को इन फ़ाइलों का अवलोकन कर तुलनात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। रिपोर्ट में यह स्पष्ट करना होगा कि सीबीआई जाँच में अपात्र पाए गए कॉलेजों को निरीक्षण अधिकारियों द्वारा किन परिस्थितियों में मान्यता दी गई, जबकि उनमें कमियाँ मौजूद थीं।

हाईकोर्ट के निर्देशानुसार, याचिकाकर्ता को अब महाधिवक्ता कार्यालय में रखी गई हज़ारों दस्तावेज़ों का अवलोकन कर अपात्र कॉलेजों को मान्यता देने वाले ज़िम्मेदार अधिकारियों के नामों सहित एक तथ्यात्मक रिपोर्ट पेश करनी होगी। इससे पहले भी कोर्ट ने प्रदेश के सभी नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता संबंधी फ़ाइलों की जाँच का आदेश दिया था, जिसके बाद याचिकाकर्ता की रिपोर्ट में कागज़ी कॉलेजों और फर्जी फैकल्टी का खुलासा हुआ था।

हाईकोर्ट के तीन प्रमुख निर्देश:

  1. छात्रों का त्वरित स्थानांतरण: अपात्र कॉलेजों में नामांकित छात्रों को 30 दिनों के भीतर योग्य संस्थानों में ट्रांसफर किया जाए।
  2. फ़ाइलों की जाँच: मान्यता प्रक्रिया की मूल फ़ाइलों के आधार पर याचिकाकर्ता को रिपोर्ट दायर करनी होगी।
  3. अमान्य एडमिशन: सीबीआई जाँच में जिन कॉलेजों में छात्रों के प्रवेश का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, उनके छात्रों को परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं होगी।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सीबीआई रिपोर्ट के आधार पर ही छात्रों का एनरोलमेंट होगा। यह निर्णय तब आया जब कई कॉलेजों ने सीबीआई को एडमिशन रिकॉर्ड नहीं दिखाए या “शून्य छात्र” होने का दावा किया, लेकिन बाद में बैक डेट एडमिशन देकर छात्रों को परीक्षा में बैठाने की कोशिश की गई।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि अपात्र कॉलेजों के छात्रों को स्थानांतरित नहीं किए जाने के कारण उनके भविष्य पर संकट है, क्योंकि इन संस्थानों में पढ़ाने के लिए आवश्यक संसाधन भी नहीं हैं। हाईकोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए 1 माह की अंतिम तिथि तय की है।

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