शिक्षकों का सवाल– क्या हम ही चोर हैं? ई-अटेंडेंस लागू करने के तरीके पर बवाल.
Teachers’ Question – Are We the Only Thieves? Uproar Over the Way E-Attendance Is Being Implemented.
Special Correspondent, Indore, MP Samwad.
Teachers across Indore protested against the mandatory mobile e-attendance system from July 1. They questioned why only teachers were being targeted, demanding equal implementation across departments. A 15-point memorandum was submitted to the Collector, warning of a statewide strike if demands are ignored. The protest reflects growing anger among educators.
MP संवाद, इंदौर में ई-अटेंडेंस (E-Attendance) को लेकर जिले भर के शिक्षकों ने कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया। दरअसल, आगामी 1 जुलाई से प्रदेश के सभी शासकीय शिक्षकों को मोबाइल ऐप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज करनी होगी। इसी के विरोध में इंदौर जिले के सैकड़ों शिक्षक-शिक्षिकाएं कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम 15 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा।
सभी विभागों में हो ई-अटेंडेंस की व्यवस्था
प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों की मांग है कि केवल शिक्षकों को ही निशाना न बनाया जाए, बल्कि प्रदेश के सभी शासकीय विभागों में एकसमान ई-अटेंडेंस प्रणाली लागू की जाए। शिक्षकों ने सवाल उठाया कि क्या केवल हम ही गैर-जिम्मेदार माने जा रहे हैं? क्या हमें चोर और मक्कार समझा जाता है? जबकि हम राष्ट्र निर्माण में अहम भूमिका निभाते हैं।
“सम्मान नहीं, अपमान झेल रहे शिक्षक”
धरने में शामिल शिक्षक हरीश ने कहा, “हमारा देश गुरु को सबसे बड़ा सम्मान देता है, लेकिन आज के मंत्रीगण शिक्षकों के सम्मान और स्वाभिमान को चौराहे पर खड़ा कर चुके हैं। हम ई-अटेंडेंस के खिलाफ नहीं हैं, पर जिस तरीके से इसे लागू किया जा रहा है, वह असंतुलन पैदा कर रहा है। आज भी शासकीय स्कूलों का परिणाम निजी स्कूलों से बेहतर है, फिर भी शिक्षकों को समाज के सामने दोषी ठहराया जा रहा है।”
“हमें बीएलओ और सर्वे जैसे कार्यों से मुक्त किया जाए”
शिक्षक प्रवीण यादव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि शिक्षकों से केवल शिक्षण कार्य ही लिया जाए। उन्हें बीएलओ और विभिन्न सर्वे कार्यों से मुक्त किया जाए। उन्होंने चेता