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“खुशबू में छिपा जहर?” बालाघाट में नकली सुगंधित चावल का बड़ा खेल.

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Poison Hidden in Fragrance?” A Major Scam of Fake Aromatic Rice in Balaghat.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, बालाघाट। जिले में नकली सुगंधित चावल के उत्पादन का बड़ा नेटवर्क सक्रिय होने के आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि कुछ राइस मिलर्स द्वारा घातक रसायनों की मदद से कृत्रिम सुगंध तैयार कर चावल को “सुगंधित” बनाकर देश-प्रदेश ही नहीं, बल्कि खाड़ी देशों तक सप्लाई किया जा रहा है। इस पूरे कारोबार में राजनीतिक संरक्षण और प्रशासनिक तंत्र की कथित मिलीभगत की भी चर्चा है।

जानकारी के अनुसार, नकली सुगंध तैयार करने के लिए प्रोपिलीन ग्लाइकोल जैसे रसायन का उपयोग किया जा रहा है। यही रसायन उस समय चर्चा में आया था जब छिंदवाड़ा जिले में जहरीले कफ सिरप के सेवन से 30 से अधिक बच्चों की मौत हो गई थी।

मृत बच्चों की बिसरा रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई थी कि कफ सिरप में डाई-एथीलीन ग्लाइकोल (DEG) और अमानक प्रोपिलीन ग्लाइकोल जैसे जहरीले तत्व पाए गए थे। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार यह रसायन अधिक मात्रा में शरीर में पहुंचने पर किडनी फेलियर और मौत तक का कारण बन सकता है।

जांच के बाद कार्रवाई की बात

इस मामले में परासिया के एसडीओपी जितेन्द्र जाट ने कहा था कि बच्चों की बिसरा रिपोर्ट में जहरीले तत्वों की पुष्टि एक महत्वपूर्ण साक्ष्य है। चिकित्सकीय समिति की विस्तृत रिपोर्ट का अध्ययन कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

बालाघाट में सुगंधित चावल का संदिग्ध कारोबार

इसी प्रकार बालाघाट जिले में भी आरोप है कि कुछ राइस मिलर्स दिल्ली की एक कंपनी के नाम से मिलने वाले “बासमती राइस स्पेशल” जैसे रसायनों का इस्तेमाल कर चावल में कृत्रिम सुगंध मिलाकर बड़े पैमाने पर नकली सुगंधित चावल तैयार कर रहे हैं।

बताया जाता है कि इस रसायन को फर्जी नामों से कुरियर के जरिए मंगाया जाता है और फिर विभिन्न ब्रांड नामों से चावल तैयार कर बाजार में बेचा जाता है।

उत्पादन और वास्तविकता में बड़ा अंतर

स्थानीय लोगों का कहना है कि जिले में “कालीमूंछ” सहित कई सुगंधित किस्मों के नाम से चावल बाजार में बड़ी मात्रा में बिक रहा है, जबकि कृषि विभाग के आंकड़े बताते हैं कि जिले में सुगंधित धान की खेती सीमित क्षेत्र में ही होती है।

सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी में भी यह सामने आया है कि जिले में सुगंधित धान का उत्पादन इतना नहीं है जितना बाजार में सुगंधित चावल उपलब्ध बताया जा रहा है।

खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन?

खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुसार किसी भी प्राकृतिक उत्पाद के मूल स्वाद और सुगंध को कृत्रिम रसायनों से बदलना प्रतिबंधित माना जाता है। चावल भी प्राकृतिक उत्पाद की श्रेणी में आता है, ऐसे में इसमें कृत्रिम सुगंध मिलाना गंभीर सवाल खड़े करता है।

कार्रवाई का इंतजार

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इस तरह का कारोबार वर्षों से चल रहा है तो आखिर जिम्मेदार विभाग अब तक सख्त कार्रवाई क्यों नहीं कर पाए।

क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या फिर नकली सुगंधित चावल के इस कारोबार पर जल्द शिकंजा कसा जाएगा—यह देखने वाली बात होगी।

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