घी में मिलावट या व्यवस्था में? दमोह में भ्रष्ट तंत्र की बू.
Adulteration in Ghee or in the System? Stench of Corruption in Damoh’s Administration.
Source Danger Bharat News, Damoh, Edited by MP Samwad.
DAMOH’S FOOD SAFETY UNDER SCANNER AS 90 KG ADULTERATED GHEE SEIZED FROM A KIRANA STORE. PUBLIC QUESTIONS YEARS-LONG TENURE OF FOOD OFFICERS. IS THIS JUST A TIP OF THE CORRUPTION ICEBERG OR SYSTEMIC NEGLIGENCE? PEOPLE DEMAND ACTION, NOT HEADLINES.
MP संवाद, दमोह। शहर में मिलावटखोरी का जाल तेजी से फैलता जा रहा है। सोमवार को खाद्य विभाग की टीम ने टोपी लाइन स्थित बजाज किराना स्टोर में छापा मारकर करीब 90 किलो मिलावटी घी जब्त किया, जिसकी कीमत लगभग ₹22,500 बताई जा रही है। नमूने जांच के लिए भोपाल भेजे गए हैं।
कार्रवाई से ज्यादा सवालों में घिरा विभाग
इस जब्ती से ज्यादा चर्चा अब खाद्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर हो रही है। आमजन का कहना है कि जब इतनी बड़ी मात्रा में मिलावटी घी पकड़ा गया है, तो यह जानना जरूरी है कि यह गोरखधंधा कब से और किसकी शह पर चल रहा था?
वर्षों से पदस्थ अधिकारी पर सवाल
स्थानीय लोगों का आरोप है कि दमोह में वरिष्ठ खाद्य अधिकारी राकेश अहिरवार वर्षों से पदस्थ हैं, और उनके लंबे कार्यकाल ने मिलावटखोरों व अफसरों के बीच गुप्त गठजोड़ तैयार कर दिया है। यही कारण है कि कार्रवाई के बावजूद मिलावटखोरी पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
PR चमकाते हैं, धरातल पर मिल रही ढील
चर्चा यह भी है कि विभाग की कार्रवाई महज़ अख़बारों की सुर्खियों तक सीमित रहती है। अधिकारी निजी पीआरओ के जरिए प्रेस विज्ञप्तियां जारी कर खुद को “एक्शन हीरो” की तरह पेश करते हैं। लेकिन ग्राउंड रियलिटी में हालात जस के तस हैं – शहर और गांवों में खुलेआम मिलावटी सामान बिक रहा है।
जनता के तीखे सवाल
- अगर विभाग ईमानदार है, तो रोज़ मिलावट की खबरें क्यों आती हैं?
- क्या छापे सिर्फ दिखावा हैं?
- मिलावटखोरों में खौफ क्यों नहीं?
मामले में भ्रष्टाचार की बू?
सूत्रों के मुताबिक, यह मामला अब सिर्फ घी की मिलावट तक सीमित नहीं है। इसमें भ्रष्टाचार और मिलीभगत की भी आशंका जताई जा रही है। लोग साफ तौर पर कह रहे हैं कि विभाग की ढिलाई और अधिकारियों की जमी हुई जड़ें ही इस अवैध धंधे को फलने-फूलने दे रही हैं।
रिपोर्ट आने के बाद असली इम्तिहान
फिलहाल खाद्य विभाग और पुलिस ने मिलावटी घी जब्त कर मामला दर्ज कर लिया है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि भोपाल लैब की रिपोर्ट आने के बाद क्या कोई ठोस कार्रवाई होगी या यह मामला भी कागज़ों में दफन होकर रह जाएगा?