छतरपुर ब्याज माफी योजना घोटाले का बड़ा खुलासा, 567 किसानों की राशि ग़ायब!
Chhatarpur Interest Waiver Scheme scam uncovered, highlighting massive fund misappropriation affecting hundreds of farmers.
Corruption exposed in Chhatarpur’s Interest Waiver Scheme — ₹2.92 crore misappropriated.
Major Scam Exposed in Chhatarpur Interest Waiver Scheme, Funds of 567 Farmers Missing!
Special Correspondent, Chhatarpur, MP Samwad.
Major corruption uncovered in Chhatarpur’s Interest Waiver Scheme—₹2.92 crore misappropriated, 567 farmers cheated. Officials involved; investigation ongoing. Local anger rises as justice remains awaited. www.mpsamwad.com brings you the full story on this alarming scam.
MP संवाद, छतरपुर जिले में मुख्यमंत्री ब्याज माफी योजना-2023 के तहत 2.92 करोड़ रुपये के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। बड़ामलहरा की डिकोली सेवा सहकारी समिति के पूर्व प्रबंधक व वर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष विद्या देवी अग्निहोत्री के पति हरिओम अग्निहोत्री पर आरोप है कि उन्होंने 567 किसानों की राशि अपात्र लोगों को बांट दी। सहकारिता विभाग की जांच में यह घोटाला पकड़ा गया, और अब छतरपुर कलेक्टर को राशि वसूलने व कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
जांच में क्या निकला?
- 15 मई 2025 को सहकारिता विभाग के अपर मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल ने छतरपुर कलेक्टर को पत्र भेजकर 292.54 लाख रुपये के गबन की पुष्टि की।
- हरिओम ने अपने परिवार व चहेतों के नाम पर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) बनवाकर राशि लूटी।
- नियमानुसार, एक किसान को सालाना 1.5 लाख रुपये तक का ऋण मिल सकता है, लेकिन हरिओम ने अपनी पत्नी (जिला पंचायत अध्यक्ष) के खाते से 15 लाख, बेटे के खाते से 18 लाख, भाई के खाते से 15 लाख, बहू के खाते से 12 लाख और एक अन्य रिश्तेदार के खाते से 15 लाख रुपये निकाले।
- चंदला की प्रियंका अग्रवाल जैसे गैर-सदस्यों के नाम पर भी KCC बनवाकर 6 लाख रुपये लूटे गए, जबकि उनका समिति से कोई लेना-देना नहीं था।
“कागजी किसानों” को मिला लाभ, असली किसानों को धोखा
जांच में पाया गया कि हरिओम ने नियमों को ताक पर रखकर:
- अपने परिवार के सदस्यों को किसान बताकर KCC बनवाए।
- एक ही वित्तीय वर्ष में एक व्यक्ति को 10 गुना ज्यादा राशि दिलवाई।
- गैर-सदस्यों को भी योजना का लाभ पहुंचाया, जबकि सहकारी समिति का नियम है कि केवल समिति के क्षेत्र के किसान ही लाभ ले सकते हैं।
अब क्या होगा?
- सहकारिता विभाग ने कलेक्टर को राशि वसूलने और प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
- स्थानीय किसान आक्रोशित हैं, मांग कर रहे हैं कि जल्द कार्रवाई हो।
- सवाल: क्या जिला प्रशासन इस बड़े घोटाले के खिलाफ सख्त कदम उठाएगा?