कांग्रेस पर आरोप, अफसरों की गलती पर चुप्पी – खाद विवाद पर मंत्री एदल सिंह कंसाना घिरे सवालों में.
Allegations on Congress, Silence on Officials’ Mistakes – Agriculture Minister Edel Singh Kansana Faces Questions over Fertilizer Dispute.
Special Correspondent, Bhind, MP Samwad.
Madhya Pradesh Agriculture Minister Edel Singh Kansana admitted fertilizer distribution failures in Bhind, blaming officials and poor systems rather than shortage. He promised reforms after farmers faced chaos and lathi-charge incidents in Rewa and Mehgaon. However, he remained silent on the collector-legislator clash, sparking political controversy and opposition attacks.
MP संवाद, भिंड में प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने शुक्रवार को स्वीकार किया कि किसानों की परेशानी खाद की कमी से नहीं, बल्कि अधिकारियों की गलतियों और अव्यवस्थित वितरण प्रणाली से बढ़ी। उन्होंने कहा कि जहां दो दुकानों की जरूरत थी, वहां एक ही दुकान से काम चलाया जा रहा था, जिससे रीवा और मेहगांव जैसी घटनाएं सामने आईं।
मुख्यमंत्री ने दी नई व्यवस्था के निर्देश
मंत्री ने बताया कि हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ बैठक में तय हुआ कि किसानों की समस्या दूर करने के लिए अब जहां एक दुकान है, वहां दो और जहां दो की जरूरत है, वहां चार दुकानें खोली जाएंगी। इससे किसानों को लाइन में लगने की नौबत नहीं आएगी और अव्यवस्था खत्म होगी।
रीवा लाठीचार्ज पर सफाई – कमी नहीं, अव्यवस्था थी कारण
रीवा में खाद वितरण के दौरान किसानों पर हुए लाठीचार्ज पर प्रतिक्रिया देते हुए कंसाना ने कहा कि यह घटना खाद की कमी के कारण नहीं, बल्कि वितरण व्यवस्था की अव्यवस्था से हुई। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा नहीं बनेगी।
कलेक्टर-विधायक विवाद और तलवारकांड पर चुप्पी
भिंड में खाद वितरण को लेकर कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव और विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाह के बीच हुए विवाद पर मंत्री ने पहले अनभिज्ञता जताई, लेकिन बाद में कहा कि “मनभेद हो गए होंगे, अब सब ठीक है।” वहीं, कलेक्टर दफ्तर में तलवार लहराने के मामले पर उन्होंने चुप्पी साध ली, जिससे कई सवाल उठने लगे।
कांग्रेस पर साधा निशाना
कृषि मंत्री ने कांग्रेस पर झूठी अफवाहें फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि विपक्ष किसानों को गुमराह कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि खरीफ फसलों के लिए 2.50 लाख मीट्रिक टन खाद की जरूरत थी, जबकि 9.40 लाख मीट्रिक टन खाद पहले ही प्रदेश में पहुंच चुका है।