बेतवा नदी सूख गई! अब क्या होगा रायसेन और विदिशा का?
Betwa River, a crucial water source for Raisen and Vidisha, is drying up. Deforestation, illegal sand mining, and borewell exploitation have worsened the crisis.
Betwa River is vanishing! Raisen and Vidisha face a severe water crisis.
Betwa River Has Dried Up! What’s Next for Raisen and Vidisha?
Source : NDTV MPCG, Edited by Sitaram Kushwaha, Special Correspondent, Vidisha, MP Samwad.
रायसेन जिले के झिरी ग्राम से निकलने वाली बेतवा नदी (Betwa River) आज अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही है। कभी जीवनदायिनी कहलाने वाली यह नदी अब पूरी तरह सूख चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव (Dr. Mohan Yadav) ने इस नदी को नर्मदा नदी (Narmada River) से जोड़ने की योजना की घोषणा की थी, लेकिन यह योजना अब तक केवल कागज़ों तक ही सीमित रही।
सूख गया बेतवा का उद्गम स्थल
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में बेतवा का उद्गम स्थल सूख चुका है। अवैध बोरिंग और जलदोहन के कारण नदी की जलधारा टूट गई है। रायसेन से लेकर विदिशा तक, बेतवा के पानी का अंधाधुंध दोहन और जल संरक्षण की अनदेखी इस नदी को खत्म करने के लिए ज़िम्मेदार हैं।
प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि इंसानी लालच का नतीजा
बेतवा नदी की यह स्थिति सिर्फ मौसम की मार नहीं, बल्कि इंसानी लालच और प्रशासनिक लापरवाही का नतीजा भी है।
- अवैध बोरिंग के कारण जलस्तर गिरता जा रहा है।
- रेत का अवैध उत्खनन नदी के प्रवाह को रोक रहा है।
- तेज़ी से घटती वर्षा और जंगलों की कटाई ने इस संकट को और गहरा कर दिया है।
पर्यावरणविद बृजेंद्र पांडे बताते हैं कि 40 साल पहले जब भोपाल की कलियासोत नदी का गंदा पानी बेतवा में मिलाया गया था, तब भी हमने आंदोलन किया था, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला।
किसानों की बढ़ी परेशानियां
किसान लक्ष्मण मीणा का कहना है:
“बेतवा की जलधारा पूरी तरह खत्म हो चुकी है। यह एक गंभीर समस्या है, लेकिन कोई इस पर ध्यान नहीं दे रहा। अधिकारी सिर्फ बयानबाज़ी कर रहे हैं और कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।”
प्रशासन का क्या कहना है?
रायसेन के कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने कहा,
“बेतवा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि हमारी आस्था और संस्कृति का केंद्र है। हमने इसे पुनर्जीवित करने की योजना बनाई है, जिसके जल्द ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।”
क्या बेतवा नदी को फिर से जीवन मिल सकता है?
अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाली पीढ़ियां सिर्फ इतिहास में बेतवा का नाम पढ़ेंगी।
- वृक्षारोपण बढ़ाना होगा ताकि भूजल स्तर ठीक रहे।
- अवैध रेत खनन और बोरिंग पर रोक लगानी होगी।
- जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन को प्राथमिकता देनी होगी।
बेतवा सिर्फ एक नदी नहीं, बल्कि रायसेन, विदिशा और मध्य प्रदेश की धरोहर है। अब समय आ गया है कि हम इसे बचाने के लिए एकजुट हों और ठोस कदम उठाएं।