बालाघाट में महिलाओं की शराबबंदी: जुर्माना, जब्ती और इनाम का ऐलान.
Women of Balaghat take charge, declaring social liquor ban with strict penalties and rewards.
Balaghat Women Enforce Prohibition: Fines, Seizure, and Rewards Announced.
Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat MP Samwad News.
बालाघाट। नया साल, नई शुरुआत—लेकिन बालाघाट के लिंगा और भोरवाही गांव की महिलाओं ने इसे केवल कैलेंडर की तारीख नहीं रहने दिया। जब वर्षों से शराब गांवों की जड़ों को खोखला कर रही थी, परिवार बिखर रहे थे और महिलाएं रोज़ अपमान व हिंसा झेल रही थीं, तब न प्रशासन जागा, न समाज। आखिरकार महिलाओं ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया।
परसवाड़ा क्षेत्र के इन दोनों गांवों में महिलाओं ने ऐलान कर दिया है—अब गांव में शराब पीना, बेचना और बनाना सामाजिक अपराध होगा। यह कोई भावनात्मक नारा नहीं, बल्कि कठोर नियमों वाला जनआंदोलन है, जिसमें जुर्माना, जब्ती और इनाम तक तय कर दिए गए हैं।
सिर्फ बातें नहीं, सख्त फैसले
शराब पीकर घर आने वाले अब ‘मजदूर’ या ‘मजबूर’ नहीं माने जाएंगे, बल्कि दोषी होंगे।
- बाहर से शराब लाने पर पहले समझाइश, फिर शराब व वाहन जब्त और 21,000 रुपये जुर्माना
- घर में शराब बनाने या मिलने पर 11,000 रुपये जुर्माना
- शराब पीते पकड़े जाने पर 5,000 रुपये जुर्माना
- शराब के अवैध कारोबार की सूचना देने पर 1,000 रुपये इनाम
महिलाओं का गुस्सा बना ताकत
अभियान की सूत्रधार संगीता देशराज का सवाल सीधा है—“शराब से मुनाफा किसका और नुकसान किसका?”
उन्होंने कहा कि शराब की असली कीमत महिलाएं और बच्चे चुका रहे हैं—मारपीट, गाली-गलौज, भय और टूटता भविष्य। यही पीड़ा अब प्रतिरोध में बदल चुकी है।
जनमंच से जनआंदोलन
लिंगा बस स्टैंड पर आयोजित जनमंच में महिलाओं ने पंचायत प्रतिनिधियों, सरपंच और ग्रामीणों को साफ संदेश दिया—अब चुप्पी नहीं, संघर्ष होगा। सरपंच कपूर वरकड़े और थाना प्रभारी मदन इवने ने इस पहल को समर्थन देते हुए माना कि शराब ही सड़क दुर्घटनाओं और अपराध की बड़ी वजह है।
यह आंदोलन बताता है कि जब शासन निष्क्रिय हो और कानून कमजोर पड़े, तब महिला शक्ति खुद कानून बन जाती है।
लिंगा-भोरवाही की यह चिंगारी अब पूरे मध्यप्रदेश में आग बन सकती है।
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