हक की लड़ाई में उतरीं बालाघाट की मजदूर महिलाएं.
Women labourers of Balaghat protesting for their unpaid wages, demanding immediate action from authorities.
Women Laborers of Balaghat Take to the Streets in the Fight for Their Rights.
Special Correspondent, Balaghat. MP Samwad News
MP संवाद, बालाघाट। सरकारी योजनाओं के नाम पर मजदूर महिलाओं से काम तो पूरा करा लिया गया, लेकिन मेहनताना देने की बारी आई तो सिस्टम ने आंखें फेर लीं! समनापुर–नेवरगांव की दर्जनों श्रमिक महिलाएं दो साल से अपनी मजदूरी के लिए भटक रही हैं, लेकिन भुगतान अभी तक नहीं हुआ। आखिरकार मजबूर होकर महिलाओं को लामता प्रोजेक्ट कार्यालय का घेराव करना पड़ा।
“काम हमारा… लेकिन भुगतान किसका?”
महिलाओं का दर्द साफ झलकता है—
राशन मुश्किल, घर चलाना मुश्किल, बच्चों की पढ़ाई मुश्किल… और अधिकारी बस “प्रक्रिया जारी है” का राग! महिलाओं ने कहा कि कई बार शिकायत के बाद भी सिर्फ आश्वासन मिला, हक नहीं।
एक हफ्ते का अल्टीमेटम—नहीं मिला पैसा, तो होगी हड़ताल
महिलाओं ने साफ चेतावनी दी—
एक हफ्ते में भुगतान करो, वरना कार्यालय के सामने अनिश्चितकालीन हड़ताल होगी।
ये सिर्फ विरोध नहीं, सिस्टम की लापरवाही पर करारा तमाचा है।
अधिकारियों का बचाव—फंड नहीं, खाते गलत!
परियोजना अधिकारी डेविड चिनाप का तर्क—फंड नहीं मिला और कुछ खातों में त्रुटियां हैं। दावा किया कि सोमवार तक भुगतान कर दिया जाएगा।
लेकिन बड़ा सवाल यही—
मजदूरों का खून-पसीना दो साल तक बकाया रखने का हक सरकार और तंत्र को किसने दिया?
क्या गरीबों की मजदूरी फाइलों और बहानों में ही दबी रहेगी?
अब निगाहें प्रशासन पर हैं…
क्या न्याय मिलेगा या फिर ये महिलाएं सिस्टम की बलि चढ़ती रहेंगी?
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