बैहर कॉलेज कांड: NCC प्रवेश की आड़ में छात्रा को परेशान करने का आरोप, प्राध्यापक जेल में.
Baihar College Scandal: Professor Accused of Harassing Student Under Guise of NCC Admission, Sent to Jail.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट जिले के बैहर स्थित शासकीय अरण्य भारतीय महाविद्यालय में NCC प्रवेश को लेकर एक छात्रा द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बाद सहायक प्राध्यापक एवं NCC प्रभारी डॉ. राजेंद्र सिंह कुसराम को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। न्यायालय ने आरोपी का जमानत आवेदन निरस्त करते हुए उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। मामले में उच्च शिक्षा विभाग ने भी विभागीय कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है।
NCC में प्रवेश के बदले कथित आपत्तिजनक संदेश
बैहर थाना प्रभारी दीपिका सिंगौर के अनुसार, कॉलेज में अध्ययनरत छात्रा ने 24 सितंबर 2026 को लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि छात्रा NCC में प्रवेश लेना चाहती थी, लेकिन सीट उपलब्ध नहीं होने की बात कहे जाने के बाद कथित तौर पर सहायक प्राध्यापक की ओर से उसके मोबाइल पर आपत्तिजनक संदेश भेजे गए।
पुलिस के अनुसार शिकायत के बाद मोबाइल संदेश, वॉयस रिकॉर्डिंग और उपलब्ध अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की गई। जांच के आधार पर आरोपी प्राध्यापक के विरुद्ध BNS की धारा 75(2) के तहत मामला दर्ज किया गया और उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया।
कोर्ट ने जमानत आवेदन किया खारिज
पुलिस ने आरोपी को न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, बैहर के न्यायालय में पेश किया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार न्यायालय ने केस डायरी और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद मामले को गंभीर प्रकृति का माना और आरोपी द्वारा प्रस्तुत जमानत आवेदन निरस्त कर दिया।
इसके बाद डॉ. कुसराम को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया। मामले की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी है। आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
उच्च शिक्षा विभाग ने किया निलंबित
मामले का संज्ञान लेते हुए उच्च शिक्षा विभाग के उपसचिव एल.के. खरे ने डॉ. कुसराम को निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उन्हें क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा, जबलपुर कार्यालय में अटैच किया गया है। विभागीय कार्रवाई पुलिस प्रकरण से अलग प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत जारी रहेगी।
यह मामला उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा, शिकायत तंत्र और संस्थागत जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि, आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप अभी न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और उन्हें दोषी तभी माना जा सकता है जब सक्षम न्यायालय द्वारा दोष सिद्ध किया जाए।
Legal Disclaimer: This report is based on police statements, departmental action and media reports available at the time of publication. The allegations mentioned herein are subject to investigation and judicial proceedings. The accused is presumed innocent unless proven guilty by a competent court.