आस्था के बीच अव्यवस्था का तमाशा — मेले में न पानी, न शौचालय, सिर्फ वसूली.
A spectacle of chaos amid faith — no drinking water, no toilets at the fair, only illegal collections.

Special Correspondent, Ashish Singh Tomar, Morena MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, मुरैना, अंबाह नगर पालिका द्वारा आयोजित जयश्वर महादेव मेले में दूर-दूर से श्रद्धालु और खरीदार तो पहुंच रहे हैं, लेकिन व्यवस्थाओं के नाम पर हालात बेहद बदहाल नजर आ रहे हैं। मेले में न तो पीने के पानी की समुचित व्यवस्था है और न ही शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं, जिससे श्रद्धालुओं के साथ-साथ दुकानदार भी भारी परेशान हैं।
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि जिस स्थान का नगर पालिका द्वारा कोई ठेका तक नहीं दिया गया, वहां भी रंगमंच के पास हाथ ठेला लगाने वाले गरीब दुकानदारों से प्रतिदिन 100 से 300 रुपये तक की अवैध वसूली किए जाने के आरोप लग रहे हैं।
यही नहीं, मेला ग्राउंड के बाहर सड़क पर अतिक्रमण कर लगाई गई दुकानों से करीब 15 हजार रुपये तक की वसूली की चर्चा भी तेजी से फैल रही है।
इस पूरे मामले पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी शबीर कौंसार का कहना है कि 30 से 50 मीटर की दूरी पर पब्लिक टॉयलेट की व्यवस्था है तथा सुबह-शाम पानी के टैंकर भी लगाए जाते हैं।
लेकिन जब मौके पर मौजूद दुकानदारों और स्थानीय लोगों से बात की गई तो उन्होंने साफ तौर पर इन दावों को नकार दिया। दुकानदारों का कहना है कि न उन्हें पानी का टैंकर दिखाई देता है और न ही पास में कोई शौचालय है। मजबूरी में उन्हें 20 रुपये का कैम्पर खरीदकर पानी पीना पड़ रहा है।
अब बड़ा सवाल यह है कि—
क्या कागजों में टैंकर दौड़ रहे हैं और ज़मीन पर लोग प्यास से जूझ रहे हैं?
और जब ठेका केवल सीमित स्थानों के लिए है, तो हर कोने से वसूली आखिर किसके इशारे पर हो रही है?
अंबाह का यह धार्मिक मेला अब श्रद्धा और आस्था से ज्यादा अव्यवस्था, अवैध वसूली और नगर पालिका के दावों पर उठते सवालों को लेकर चर्चा का केंद्र बन गया है। जनता पूछ रही है कि क्या नगर पालिका इस पूरे खेल की निष्पक्ष जांच कराएगी या फिर हर साल की तरह मामला फाइलों में दबा दिया जाएगा?