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घी में मिलावट की हुई पुष्टि, 800 लीटर मिलावटी घी खाद्य विभाग ने किया जब्त, अधिकारी भी स्टॉक देखकर चौंक गए

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 इंदौर
इंदौर जिले में मिलावटखोरी की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। यहां असली के नाम पर मिलावटी खाद्य पदार्थ की बिक्री बड़ी मात्रा में की जा रही है। गत दिवस खाद्य विभाग ने मिलावटी घी की आशंका में एक गोदाम पर छापा मारा था और वहां से सैंपल लिए थे। जिसकी रिपोर्ट में घी में मिलावट पाई गई।

अधिकारियों के मुताबिक गत माह विभाग को शिकायतकर्ता से सूचना मिली थी कि राजस्थान की एक घी निर्माता फर्म बाल गोपाल डेरी प्रोडक्ट्स, रणपुर, कोटा द्वारा घी को इंदौर के संचार नगर स्थित मार्केटिंग फर्म श्री कुबेर इंटरप्राइजेस के माध्यम से बेचा जा रहा है।

इसके बाद टीम मौके पर पहुंची तो संचालक के पास शहर में खाद्य पदार्थ विक्रय का कोई लाइसेंस नहीं मिला। संचालक ने झाबुआ के पते का लाइसेंस दिखाया।
महाश्री ब्रांड का मिलावटी घी

प्रतिष्ठान में महाश्री ब्रांड के गाय व भैंस के घी के अलग-अलग पैकिंग के पांच नमूने टीम ने लिए थे, करीब 5.40 लाख रुपये कीमती 800 लीटर घी जब्त किया था। अभी दो नमूनों की रिपोर्ट विभाग को मिली है। जिसमें घी अमानक स्तर का पाया गया। घी में अन्य तेल मिला है। अभी तीन नमूनों की रिपोर्ट आना बाकी है।
निजी लैब ने सैंपल पास कर दिए थे

शिकायतकर्ता ने शक होने पर एमआर-10 स्थित नामी निजी लैब में जांच करवाई थी, जिसकी रिपोर्ट आठ दिन बाद आई और उसमें घी सही बताया गया। एक अन्य प्रयोगशाला में इसकी जांच करवाई, इसकी रिपोर्ट तीन घंटे में आई। इसमें मिलावट मिली थी। यानी शहर की कई लैब से साठगांठ करके मिलावटी नमूनों को सही बताया जा रहा है। वहीं शासकीय लैब में भी घी में मिलावट पाई गई।

औद्योगिक इकाइयों की जांच में नहीं मिली अनियमितताएं

इंदौर जिले में नशे के दुरुपयोग की आशंका वाली औषधीय और सिंथेटिक ड्रग्स वाली इकाइयों की जांच की जा रही है। विभिन्न विभागों की टीमों ने लगातार दूसरे दिन उद्योगों की जांच का अभियान चलाया।

इसमें 11 से अधिक इकाइयों का निरीक्षण किया गया जिनमें किसी भी तरह की अनियमिताएं नहीं मिली। खुड़ैल क्षेत्र में एसडीएम गोपाल वर्मा के नेतृत्व में औषधि निरीक्षक अलकेश यादव व जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र एवं राजस्व विभाग के संयुक्त निरीक्षण दल द्वारा सात औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया गया।

एसडीएम ने बताया कि जिन औद्योगिक इकाइयों का निरीक्षण किया गया उनमें आबकारी विभाग द्वारा जारी एल्कोहल ड्रग्स लाइसेंस आदि की जांच की गई। सभी इकाइयों में नारकोटिक्स से संबंधित उत्पाद नहीं पाया गया।

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