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धूप में जली, बारिश में सड़ी! ग्वालियर में लाखों की ट्राईसाइकिलें बर्बाद.

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ग्वालियर में दिव्यांगों की ट्राईसाइकिलें धूप और बारिश में सड़ती हुई दिखीं mpsamwad

Burned in the Sun, Rusted in the Rain! Tricycles Worth Lakhs Wasted in Gwalior.

Special Correspondent, Gwalior, MP Samwad.

MP संवाद, ग्वालियर। हुरावली स्थित दिव्यांग छात्रावास के मैदान में लाखों की कीमत की ट्राईसाइकिलें लावारिस हालात में धूप और बारिश में सड़ रही हैं। ये वाहन दिव्यांगजनों के लिए केंद्र सरकार की योजना के तहत आए थे ताकि वे सुगम आवागमन के जरिए मुख्यधारा से जुड़ सकें। लेकिन अफसरशाही की लापरवाही ने इनका उपयोग होने से पहले ही इन्हें कबाड़ में तब्दील कर दिया।

ट्राईसाइकिलें न वितरित, न संरक्षित – गैलरी और ग्राउंड में सड़ रही हैं

अनूप जोहरी, दिव्यांग कल्याण संस्था के संयोजक ने बताया कि हुरावली स्थित मूक-बधिर छात्रावास के बाहर मैदान में लगभग 70–80 ट्राईसाइकिलें खराब हालत में पड़ी हैं। इनमें से कई की चेन और चेन फ्रायबिल चोरी हो चुकी है। वहीं छात्रावास के किचन के पास लगभग 20–25 ट्राईसाइकिलें खुले में रखी गई हैं, जिनमें जंग लगना शुरू हो गया है।

केंद्र की योजना, राज्य की बेरुखी

बताया गया कि यह सारा सामान 2024 में सामाजिक न्याय विभाग द्वारा आयोजित शिविरों के बाद, ALIMCO जबलपुर से मंगवाया गया था। इन ट्राईसाइकिलों को ग्वालियर जिले की शहरी व ग्रामीण तहसीलों के चिन्हित दिव्यांगजनों को वितरित किया जाना था, लेकिन आज तक एक भी वितरण नहीं हुआ।

ट्राईसाइकिलें वहीं पड़ी-पड़ी बर्बाद हो रही हैं, जबकि विभाग को चाहिए था कि लाभार्थियों को कॉल कर तहसीलों में जाकर वितरण कराता।

मंत्री बोले– आवेदन पर देंगे, पर जवाब गोलमोल!

सामाजिक न्याय मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने बयान दिया कि “जब कोई जरूरतमंद दिव्यांग आवेदन करता है, तो उसे ट्राईसाइकिल दी जाती है।” साथ ही उन्होंने कहा, “अगर गाड़ियां ठीक से नहीं रखी गईं, तो जांच कराएंगे।”

लेकिन मंत्री जी से सवाल यह है कि इन गाड़ियों की कंडम स्थिति का जिम्मेदार कौन है? क्या लाखों की ट्राईसाइकिलें सिर्फ इसलिए सड़ने दी जाएं कि किसी ने वितरण की प्रक्रिया ही पूरी नहीं की?

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