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मेवे में मिला भ्रष्टाचार! शहडोल पंचायत ने बिलों से बढ़ाया घोटाले का स्वाद.

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mpsamwad.com Shahdol Dry Fruit Scam

Corruption Mixed with Dry Fruits! Shahdol Panchayat Spiced Up the Scam with Inflated Bills.

Special Correspondent, Shahdol, MP Samwad.

In Shahdol’s Jal Ganga campaign event, officials consumed 13 kg dry fruits and sweetened tea with 5 kg sugar. Viral bills exposed inflated prices, including ₹1000/kg cashews and double-priced sweets. Locals suspect corruption in food expenses. Authorities promised action after widespread public outrage and social media criticism.

MP संवाद, शहडोल। मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में स्कूल ऑयल पेंट घोटाले के बाद अब जल गंगा संवर्धन अभियान के पंचायत स्तरीय कार्यक्रम में एक और घोटाला सामने आया है, जो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

यह मामला 25 मई को भदवाही ग्राम पंचायत में आयोजित जल गंगा कार्यक्रम से जुड़ा है, जहां सिर्फ एक घंटे की उपस्थिति में अधिकारियों ने 13 किलो ड्राई फ्रूट्स और 6 लीटर दूध में 5 किलो शक्कर डालकर बनाई गई चाय का लुत्फ उठाया।

इस आयोजन में कलेक्टर डॉ. केदार सिंह, जिला पंचायत सीईओ नरेंद्र सिंह, एसडीएम प्रगति वर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। ग्राम पंचायत ने कार्यक्रम के दौरान टेंट, नाश्ता और भोजन की व्यवस्था की थी।

बिल बना चर्चा का विषय, सोशल मीडिया पर वायरल

अब इस कार्यक्रम से संबंधित भोजन और सामग्री के बिल सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। जिनमें खर्च का ब्यौरा देखकर लोग हैरान हैं। अफसरों के स्वागत के नाम पर ग्राम पंचायत द्वारा—

  • 5 किलो काजू, 6 किलो बादाम, 3 किलो किशमिश = ₹19,010
  • 6 लीटर दूध + 5 किलो शक्कर = चाय
  • 30 किलो नमकीन, 20 पैकेट बिस्कुट
  • 50 रसगुल्ले (10 रुपये वाले) को ₹1000 में बिल किया गया

इनमें सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि काजू दो अलग-अलग दुकानों से खरीदे गए और कीमतों में बड़ा अंतर था। एक बिल में काजू ₹1000 प्रति किलो दर्शाए गए, जबकि उसी दिन दूसरी दुकान से ₹600 प्रति किलो में खरीदे गए।

पूरी-सब्जी और अन्य खर्च भी विवादित

सुरेश तिवारी टी स्टॉल और नारायण टी स्टॉल से पूरी-सब्जी के पैकेट भी खरीदे गए और गोविंद किराना स्टोर से उसे बनाने का सामान भी। ऐसे में कुल खर्च को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

जांच का दावा, जवाब नहीं साफ

इस मामले पर जिला पंचायत के प्रभारी सीईओ एमपी सिंह का कहना है कि–
“हम आयोजन में जरूर गए थे, लेकिन वहां इतना ड्राई फ्रूट नहीं था। बिलों की जांच करवाई जाएगी और दोषियों पर कार्रवाई होगी।”

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