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मुरैना जिले के पहाड़गढ़ के जंगली क्षेत्र में बेरई गांव में बेहद दुर्लभ प्रजाति का छोटा भारतीय कस्तूरी बिलाव दिखा

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मुरैना
मुरैना जिले के पहाड़गढ़ के जंगली क्षेत्र में आने वाले बेरई गांव में बेहद दुर्लभ प्रजाति का छोटा भारतीय कस्तूरी बिलाव (इंडियन स्मॉल सीवेट) नाम का जीव अपने नवजात बच्चों के साथ दिखा है। जानकारी लगने के बाद वन विभाग की टीम ने उस खेत के चारों ओर सुरक्षा के लिए वनकर्मी तैनात कर दिए हैं, जहां ये दुर्लभ जीव मिला है। छोटे बच्चों के बीच बैठे बिल्ली से बड़े आकार के जीव के शरीर पर धारियां थी, जो बंटी की तरफ घुर्राया। ग्रामीणों ने इसे चीता या तेंदुआ जैसा जीव माना, सूचना मिलने पर पहुंची वन टीम भी इसे पहचानने में धोखा खा गई और पहले इसे कवरबिज्जू बताया गया।

बाद में जब इन जीवों के फोटो-वीडियो विशेषज्ञों को भेजे गए तब पता चला, कि यह दुर्लभ प्रजाति का इंडियन स्माल सीवेट है। वन विभाग के डीएफओ स्वरूप दीक्षित ने बताया, कि यह जानवर मांसाहारी है, जो सांप, पक्षी, खरगोश जैसे छोटे जंगली जानवर, चूहों तक का शिकार करता है। इंसानों पर भी हमला करने से यह पीछे नहीं हटता। डीएफओ ने बताया, कि चंबल अंचल में किसी रिहायसी बस्ती के पास इस जीव को पहली बार देखा गया है।

ऐसा है है इंडियन स्मॉल सीवेट
इंडियन स्मॉल सीवेट विवेरिकुला वंश की प्रजाति का इकलौता जीव है, जो दक्षिणी पूर्वी एशिया और भारत के दक्षिणी हिस्से में पाई बहुत कम संख्या में दिखता है। इसके शरीर पर काले, सफेद, भूरे रंग की धारियां होती हैं। तेज नुकीले पंजे व दांत होते हैं। इसके पंजे व दांतो की पकड़ मजबूत होती है, जिससे शिकार करता है। दूर से बिल्ली की तरह दिखने वाला यह जीव बिल्ली की तुलना में लंबा होता है। सिर से शरीर तक इसकी लंगाई 21 से 23 मीटर तक हो सकती है, जबकि इसकी पूंछ की लंबाई 15 से 17 इंच लंबी होती है।

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