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छिंदवाड़ा के कबीर दास शहीद का पैतृक गांव में आज होगा अंतिम संस्कार, नागपुर से लाई जा रही पार्थिव देह

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 छिंदवाड़ा

जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले में शहीद हुए जवान कबीर दास उईके की पार्थिव देह आज छिंदवाड़ा लाई जा रही है। पैतृक गांव पुलपुलडोह में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

मंगलवार रात 8 बजे जम्मू – कश्मीर के कठुआ जिले के हीरानगर स्थित सैदा सुखल गांव में आतंकी हमला हुआ था। सीआरपीएफ के कॉन्स्टेबल कबीर दास गोली लगने से घायल हो गए थे। बुधवार सुबह इलाज के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली थी।

शहीद की पार्थिव देह हवाई मार्ग से गुरुवार सुबह नागपुर लाई गई। यहां से सड़क मार्ग से पुलपुलडोह (मरजातपुर) लाई जा रही है। स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उईके अंतिम संस्कार में शामिल होंगी।

गोली लगने से घायल हुए थे कबीर
बता दें कि मंगलवार रात 8 बजे जम्मू-कश्मीर के कठुआ के हीरानगर स्थित सैदा सुखल गांव में आतंकी हमला हुआ था। सीआरपीएफ के  Constable कबीर दास गोली लगने से घायल हुए थे। बुधवार सुबह इलाज के दौरान कबीर ने अंतिम सांस ली थी। बता दें कि शहीद हुए कबीर चार भाई-बहन में सबसे बड़े थे। कबीर के शहीद होने की खबर सुनकर सभी का रो-रोकर बुरा हाल है।

2011 में जॉइन की थी सीआरपीएफ
जानकारी के मुताबिक, 35 साल के कबीर दास उईके छिंदवाड़ा की बिछुआ तहसील के पुलपुलडोह के रहने वाले थे। 2011 में उन्होंने सीआरपीएफ जॉइन की थी। 4 साल पहले उनकी शादी हुई थी। परिवार में मां इंदरवति उईके, पत्नी ममता उईके और दो भाई हैं। दो बहनों की शादी हो चुकी है। पिता का निधन हो चुका है। 8 दिन पहले ही 20 दिन की छुट्टी के बाद वे ड्यूटी पर लौटे थे। उनकी पोस्टिंग भोपाल में होने वाली थी। कबीर की सैलरी पर पूरा परिवार आश्रित रहता था।

मोहन यादव, नकुलनाथ ने अर्पित की श्रद्धांजलि
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने जम्मू-कश्मीर के डोडा में हुए आतंकवादी हमले में शहीद छिंदवाड़ा के जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की। छिंदवाड़ा के पूर्व सांसद नकुलनाथ ने शोक व्यक्त करे हुए एक्स पर Tweet किया कि देशसेवा में आपके सर्वोच्च बलिदान का देश सदैव ऋणी रहेगा। छिंदवाड़ा सांसद विवेक बंटी साहू और महापौर विक्रम अहाके शहीद के घर पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया।

2020 में हुई थी शहीद कबीर दास की शादी

कबीर दास की 4 साल पहले 2020 में शादी हुई थी. शहीद के परिवार में पत्नी, एक छोटा भाई, मां और दो शादीशुदा बहने हैं. शहीद की अभी कोई संतान नहीं है. वो 10 दिन पहले ही छुट्टी से ड्यूटी पर लौटे थे.

 

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