3 साल, 1 बैठक, 0 कानून — MP के पत्रकार आज भी असुरक्षित!
3 Years, 1 Meeting, 0 Law — Journalists in MP Still Unsafe!

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Bhopal, MP Samwad News.
घोषणा हुई, समिति बनी, एक बैठक हुई — और फिर सब गायब!
7-8 सितंबर 2023 को तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पत्रकार समागम में पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की घोषणा की। 20 सितंबर को पांच सदस्यीय समिति गठित हुई — अपर मुख्य सचिव (गृह) को अध्यक्ष बनाया गया। 25 सितंबर को जनसंपर्क विभाग ने आदेश क्रमांक PRE/2/0002/2023 जारी कर वरिष्ठ पत्रकार महेश श्रीवास्तव को सदस्य नामांकित किया। समिति को दो महीने में रिपोर्ट देनी थी। अक्टूबर 2023 में एक बैठक हुई — और उसके बाद समिति का नामोनिशान मिट गया। चुनाव आए, नई सरकार बनी — लेकिन न दूसरी बैठक हुई, न रिपोर्ट आई, न कानून बना।
16 महीने कोई संपर्क नहीं, महाराष्ट्र कानून की कॉपी तक नहीं मिली — समिति सदस्य का खुलासा!
समिति सदस्य महेश श्रीवास्तव ने 2025 में सार्वजनिक रूप से कहा — “गठन के बाद केवल एक बैठक हुई। 16 महीनों तक न कोई बैठक बुलाई गई, न सरकार की ओर से किसी सदस्य से संपर्क हुआ।” यहां तक कि महाराष्ट्र जैसे राज्यों के पत्रकार सुरक्षा कानून की कॉपी तक उपलब्ध नहीं कराई गई। 2026 में मंदसौर विधायक विपिन जैन ने विधानसभा में यह मुद्दा उठाया — सरकार के पास कोई जवाब नहीं था। तीन साल में सरकारी भाषा में “प्रक्रिया जारी है” — आम भाषा में यह “फाइल में दबा आदेश” बनकर रह गया है।
पत्रकारों पर हमले जारी, कानून अधर में — फाइल में सुरक्षा, मैदान में खतरा!
इन तीन सालों में मध्यप्रदेश में पत्रकारों पर हमले, धमकियां, पुलिस कस्टडी में दुर्व्यवहार और सोशल मीडिया अकाउंट सस्पेंड होने की घटनाएं थमी नहीं। अवैध रेत खनन की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों को सुरक्षा मांगनी पड़ी। बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौतों की खबर लिखने वाले स्वतंत्र पत्रकारों के अकाउंट बंद हुए। फिर भी सुरक्षा कानून का मसौदा तक नहीं बना। सवाल सीधा है — “आदेश जारी करना आसान है, अमल करना मुश्किल — पत्रकारों की सुरक्षा फाइलों में नहीं, मैदान में चाहिए। पत्रकार सुरक्षा कानून कब आएगा?”
Legal Disclaimer.
This news report is based on official government orders, public statements made by committee member Mahesh Shrivastava, legislative proceedings in the Madhya Pradesh Vidhan Sabha raised by MLA Vipin Jain, and publicly available information regarding the journalist protection law committee formed in September 2023. The report does not intend to defame any individual, government body, political party, or institution. All facts mentioned are based on official records and public domain information. MP Samwad publishes this report strictly in public interest to highlight the status of journalist safety and press freedom in Madhya Pradesh. For corrections or clarifications, contact mpsamwad.com.