सागर शराब कांड: हाईकोर्ट ने रास्ता दिखाया, क्या न्यायिक आयोग खोलेगा पूरे मामले की परतें?
Sagar Liquor Tragedy: High Court Paves the Way — Will the Judicial Commission Uncover the Full Truth Behind the Case?

Special Correspondent, Sagar, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, सागर/भोपाल। मध्यप्रदेश के सागर जिले के बहुचर्चित जहरीली शराब कांड को लेकर मंगलवार, 22 सितंबर 2026 को जबलपुर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। हाईकोर्ट की चीफ जस्टिस अल्पेश यशवंत कोगजे और जस्टिस विवेक जैन की डिवीजन बेंच ने मामले में दायर जनहित याचिका का निराकरण कर दिया। अदालत ने राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों, मुआवजे और न्यायिक जांच आयोग के गठन को रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि फिलहाल मामले में आगे हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।
हालांकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी है कि यदि उसे जांच के किसी पहलू पर आपत्ति या कोई अन्य तथ्य सामने रखना है, तो वह रिटायर्ड हाईकोर्ट जज वीपीएस चौहान की अध्यक्षता वाले न्यायिक जांच आयोग के समक्ष अपनी बात रख सकता है। अदालत के आदेश के मुताबिक भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के उपायों को भी आयोग के समक्ष उठाया जा सकता है।
सरकार ने हाईकोर्ट में बताई कार्रवाई, 52 लोगों पर FIR और 32 गिरफ्तार
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को मामले में की गई कार्रवाई की जानकारी दी गई। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने बताया कि 52 लोगों के खिलाफ तीन FIR दर्ज की गई हैं और 32 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। सरकार ने यह भी बताया कि मृतकों के परिवारों को प्रति परिवार 4 लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है।
सरकार के अनुसार घटना के बाद प्रभावित क्षेत्रों में कार्रवाई तेज की गई और करीब 20 किलोमीटर के दायरे में सात कंपोजिट शराब दुकानों को सील किया गया। इसके अलावा अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और बिक्री के खिलाफ पुलिस एवं आबकारी विभाग द्वारा अभियान चलाने की जानकारी भी अदालत को दी गई।
सरकार ने स्वास्थ्य संबंधी कार्रवाई का भी ब्यौरा अदालत के सामने रखा। बताया गया कि सिविल अस्पताल बांदा, जिला अस्पताल सागर और बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में करीब 102 प्रभावित मरीजों का मुफ्त उपचार किया गया। वहीं 11 से 19 सितंबर के बीच विशेष स्वास्थ्य टीमों ने 70 शिविर लगाकर 1,969 मरीजों की जांच की।
मौतों के आंकड़े पर अलग-अलग दावे, न्यायिक जांच आयोग के सामने उठेंगे सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से मीडिया रिपोर्टों के आधार पर 39 लोगों की मौत का उल्लेख किया गया, जबकि राज्य सरकार की ओर से मृतकों की संख्या अलग बताई गई। हाईकोर्ट के समक्ष यह अंतर भी सामने आया।
याचिकाकर्ता की ओर से जांच के दायरे और घटना के कुछ पहलुओं को लेकर आपत्ति जताई गई। इसके जवाब में अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता को लगता है कि घटना से जुड़े कुछ पहलुओं की जांच नहीं हो रही है, तो वह न्यायिक जांच आयोग के समक्ष अपने तथ्य और आपत्तियां प्रस्तुत कर सकता है।
राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि 12 सितंबर 2026 को न्यायिक जांच आयोग के गठन संबंधी अधिसूचना जारी की गई है और आयोग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए तीन महीने का समय दिया गया है। आयोग की अध्यक्षता सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज वीपीएस चौहान कर रहे हैं।
शराब लाइसेंस निरस्तीकरण पर भी हाईकोर्ट में चुनौती, आगे आयोग की रिपोर्ट पर नजर
मामले में शराब ठेकेदार सिद्धार्थ सिंह कुशवाहा के लाइसेंस को आबकारी विभाग द्वारा निरस्त किए जाने के खिलाफ दायर याचिका का भी उल्लेख सामने आया। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार उनकी लाइसेंस निरस्तीकरण को चुनौती देने वाली याचिका हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। अदालत ने यह भी कहा कि ठेकेदार के पास अपील का विकल्प मौजूद है।
अब इस पूरे प्रकरण में अगला महत्वपूर्ण पड़ाव न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट होगी। हाईकोर्ट ने फिलहाल जनहित याचिका का निराकरण कर दिया है, लेकिन भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए और घटना से जुड़े कौन-कौन से पहलू जांच के दायरे में आते हैं, यह मुद्दा आयोग के समक्ष रखा जा सकता है।
Legal Disclaimer: This report is based on publicly available court proceedings and media reports as of September 22, 2026. Allegations and claims mentioned in relation to the case should not be treated as established facts unless determined by a competent court or investigation authority.