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सागर में 34 मौतें, फिर भी 84 अवैध शराब ठिकाने! सिस्टम पर बड़ा सवाल.

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34 Deaths in Sagar, Yet 84 Illegal Liquor Hotspots! Serious Questions Over the System.

सागर शराबकांड में 34 मौतें और 84 अवैध शराब ठिकानों पर सवाल
सागर में शराबकांड के बीच 84 अवैध शराब ठिकानों की जानकारी सामने आने से सिस्टम की निगरानी पर सवाल।

Special Correspondent, Richa Tiwari, Bhopal, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, भोपाल मध्यप्रदेश में अवैध शराब के कारोबार को लेकर सरकारी तंत्र की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आबकारी विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार प्रदेश के 51 जिलों में 1,766 ऐसे ठिकाने चिह्नित किए गए हैं, जहां अवैध शराब के निर्माण, खरीद-बिक्री या कारोबार की गतिविधियों का इतिहास रहा है। सवाल सीधा है—जब सरकार के पास अवैध शराब के संभावित ठिकानों की सूची मौजूद है, तो कार्रवाई के लिए मौतों का इंतजार क्यों किया जा रहा है?

सबसे गंभीर स्थिति सागर की बताई जा रही है। जहरीली शराब त्रासदी के बाद भी आबकारी विभाग के रिकॉर्ड में सागर जिले के 84 स्थान अवैध शराब के कारोबार से जुड़े बताए गए हैं। राजधानी भोपाल में भी 30 स्थान चिह्नित किए गए हैं।

सागर में मौतों के बाद भी 84 ठिकाने क्यों?

सागर में कथित जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद प्रशासन ने अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई तेज की। लेकिन यदि विभाग के रिकॉर्ड में पहले से ही 84 संभावित ठिकाने मौजूद थे, तो बड़ा सवाल है कि इन स्थानों की नियमित निगरानी कितनी प्रभावी थी?

आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना के अनुसार, ऐसे क्षेत्रों की पहचान की गई है जहां अवैध शराब निर्माण और बिक्री का इतिहास रहा है तथा वहां नियमित निगरानी और दबिश की कार्रवाई की जाएगी।

लेकिन सवाल यह है कि यह निगरानी पहले क्यों नहीं हुई? क्या चिन्हित ठिकानों पर मौतों से पहले नियमित जांच और दबिश की गई थी? अगर की गई थी तो कार्रवाई का परिणाम क्या रहा?

मौतों के बाद बुलडोजर एक्शन, पहले कार्रवाई क्यों नहीं?

सागर के बंडा-शाहगढ़ क्षेत्र में कथित जहरीली शराब त्रासदी के बाद पुलिस और प्रशासन ने अवैध निर्माणों के खिलाफ बड़ा अभियान चलाया। मालथौन, बांदरी, बंडा और शाहगढ़ क्षेत्रों में एनएच-44 के किनारे शासकीय भूमि पर बने 70 से अधिक कथित अवैध ढाबों, होटलों और टपरों पर बुलडोजर कार्रवाई की गई। रिपोर्ट के अनुसार, इसमें मामले से जुड़े आरोपियों के कथित अवैध निर्माण भी शामिल थे।

कार्रवाई निश्चित तौर पर प्रशासनिक संदेश देती है, लेकिन असली सवाल फिर वही है—क्या सिस्टम को इन गतिविधियों की जानकारी पहले नहीं थी?

रीवा टॉप पर, उज्जैन के पवित्र नगर भी सवालों में

विभागीय सूची के अनुसार रीवा में 140, सागर में 84, उमरिया में 74 और छिंदवाड़ा में 68 स्थान चिह्नित हैं। जबलपुर और गुना में 62-62, नर्मदापुरम में 59, राजगढ़ में 57, धार में 56 और मऊगंज में 54 स्थान बताए गए हैं। दतिया और रतलाम में 47-47, जबकि शिवपुरी, भिंड और बालाघाट में 46-46 स्थान दर्ज बताए गए हैं।

चौंकाने वाली बात यह भी है कि शराबबंदी वाले कुछ तथाकथित पवित्र नगरों में भी अवैध शराब के ठिकाने सूचीबद्ध हैं। उज्जैन जिले में ऐसे 28 स्थान बताए गए हैं।

अब जरूरत सिर्फ सूची बनाने की नहीं, बल्कि यह बताने की है कि 1,766 चिह्नित ठिकानों में से कितनों पर कार्रवाई हुई, कितनों पर FIR दर्ज हुई और कितने स्थान आज भी सक्रिय हैं।

क्योंकि सवाल अवैध शराब की सूची का नहीं, उस सूची के बावजूद होने वाली मौतों का है।

Legal Disclaimer: This report is based on media reports, departmental data and administrative statements; alleged illegal activities and individual responsibility remain subject to verification and legal determination.

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