करोड़ों का राजस्व, गड्ढों में सड़क! बरही में सिस्टम फेल?
Crores in Revenue, Roads Full of Potholes! Has the System Failed in Barhi?

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News
MP संवाद समाचार, कटनी/भोपाल। कटनी। बरही में वर्षों से बदहाल सड़क अब सिर्फ नागरिकों की परेशानी नहीं, बल्कि नगर परिषद और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल बन गई है। गड्ढों में तब्दील इस सड़क के निर्माण की मांग को लेकर अब नगर परिषद उपाध्यक्ष मोहन सिंह, पार्षद संतोष द्विवेदी, निर्माण प्रभारी पार्षद इकबाल पवार, पार्षद पति श्रवण सोनी और पार्षद हीरालाल महतेल आंदोलन की चेतावनी दे चुके हैं।
दिलचस्प बात यह है कि ये सभी सत्ताधारी दल से जुड़े जनप्रतिनिधि बताए जा रहे हैं। सवाल सीधा है—जब नगर परिषद में सत्ता भी अपनी है और जनप्रतिनिधि भी अपने, तो चार वर्षों में सड़क का निर्माण क्यों नहीं हो सका?
कायदे से सड़क निर्माण का प्रस्ताव नगर परिषद से पारित कर शासन-प्रशासन को भेजा जाना चाहिए था। अब यदि ऐसा नहीं हुआ तो जिम्मेदारी तय करने का सवाल भी उठता है।
20 साल से गड्ढों में तब्दील सड़क, बारिश में बन जाता है ‘तालाब’
नगर परिषद बरही के छिदिया-हीरापुर क्षेत्र के रहवासी कथित तौर पर करीब दो दशक से सड़क की बदहाली झेल रहे हैं। बारिश शुरू होते ही सड़क बड़े-बड़े गड्ढों में बदल जाती है और उनमें जमा गंदा पानी देखकर सड़क और तालाब के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है।
कीचड़, जलभराव और गंदगी के बीच राहगीरों, महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई स्थानों पर सड़क की हालत इतनी खराब बताई जाती है कि राहगीरों को यह समझना मुश्किल हो जाता है कि सड़क कहां है और गड्ढा कहां।
गर्मी में जब कीचड़ सूखता है तो यही रास्ता धूल का मैदान बन जाता है। यानी मौसम कोई भी हो, परेशानी नागरिकों की ही है।
क्रशर और भारी वाहनों की आवाजाही, राजस्व करोड़ों में फिर सड़क बेहाल
इस मार्ग से क्रशर प्लांट और खनन क्षेत्रों से निकलने वाले भारी वाहनों और ट्रकों की आवाजाही होने की जानकारी सामने आई है। ददरा, कनौर और जाजागढ़ क्षेत्र में संचालित माइंस एवं क्रशर प्लांटों से गिट्टी का परिवहन इसी मार्ग से होने का दावा किया जा रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, खनन गतिविधियों से मिलने वाले राजस्व का एक हिस्सा जिला खनिज प्रतिष्ठान (DMF) फंड में जमा होता है। यदि इस क्षेत्र से प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है, तो सवाल यह है कि प्रभावित सड़क के स्थायी निर्माण और रखरखाव के लिए उसका उपयोग क्यों नहीं दिखाई देता?
हालांकि राजस्व की वास्तविक राशि और सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत अथवा खर्च राशि की आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है।
अध्यक्ष की गुहार और पार्षदों की धमकी—अब असर होगा या फिर वही कहानी?
बरही की सड़क का मुद्दा हर साल बारिश के साथ फिर सामने आता है। नागरिक परेशान होते हैं, जनप्रतिनिधि आवाज उठाते हैं और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की जाती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इस बार सिर्फ बयान और आंदोलन की चेतावनी होगी या सड़क का स्थायी समाधान भी निकलेगा?
सबसे बड़ा सवाल नगर परिषद से है—यदि पिछले चार वर्षों से परिषद में सत्ताधारी दल का प्रभाव है, तो अब आंदोलन की नौबत क्यों आई?
और जिला प्रशासन से सवाल है—यदि भारी वाहनों की आवाजाही वाले मार्ग से खनन गतिविधियों के जरिए राजस्व प्राप्त हो रहा है, तो उस क्षेत्र की बुनियादी सड़क व्यवस्था की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
बरही के नागरिकों को अब आश्वासन नहीं, गड्ढों से मुक्ति और सुरक्षित सड़क चाहिए। जनता की परीक्षा दो दशक से हो रही है। अब परीक्षा जनप्रतिनिधियों और प्रशासन की है।
Legal Disclaimer: This report is based on information and claims provided to the publication. Revenue figures, responsibilities and allegations require verification from official records and concerned authorities.