26 मौतें और जवाब का इंतजार! बैगा बच्चों के स्वास्थ्य संकट पर कब टूटेगी खामोशी?
26 Deaths and Still Waiting for Answers! When Will the Silence End Over the Health Crisis Facing Baiga Children?

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। बालाघाट। जिले के आदिवासी बाहुल्य बिरसा विकासखंड में बैगा आदिवासी बच्चों की मौत का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब बच्चों की मौत का आंकड़ा बढ़कर 26 तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। ताजा मामला लालपुर ग्राम पंचायत के धामनगांव का है, जहां चार वर्षीय माही मरकाम, पिता राकेश मरकाम, की इलाज के दौरान मौत हो गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार माही को 23 अगस्त को तेज बुखार के चलते गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल बालाघाट में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उसकी स्थिति बिगड़ने पर उसे 24 अगस्त को बेहतर इलाज के लिए महाराष्ट्र के गोंदिया ले जाया गया। वहां से माही को दोबारा बालाघाट जिला चिकित्सालय लाया गया, जहां इलाज के दौरान 24-25 अगस्त की दरमियानी रात उसकी मौत हो गई।
तेज बुखार के बाद बिगड़ी हालत, गोंदिया ले जाने के बाद फिर बालाघाट लौटे
बताया जा रहा है कि माही की तबीयत खराब होने के बाद परिवार उसे लेकर अस्पताल पहुंचा था। जिला अस्पताल में भर्ती कराने के बाद उसकी हालत गंभीर होने पर उसे गोंदिया ले जाया गया।
लेकिन वहां से उसे पुनः बालाघाट जिला चिकित्सालय लाया गया। इलाज के दौरान मासूम ने दम तोड़ दिया। एक छोटे बच्चे के इलाज के लिए परिवार को बालाघाट से गोंदिया और फिर वापस बालाघाट जाना पड़ा—यह स्थिति दूरस्थ आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गंभीर मरीजों के रेफरल सिस्टम पर सवाल खड़े करती है।
हालांकि माही की मौत का अंतिम चिकित्सकीय कारण जांच और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होगा।
26 मौतें और लगातार उठते सवाल—कहां चूक रही निगरानी व्यवस्था?
बिरसा क्षेत्र में बच्चों की लगातार हो रही मौतों के बीच अब आंकड़ा 26 तक पहुंचने की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल और गंभीर हो गए हैं।
इससे पहले भी प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सर्वे, टीकाकरण, मलेरिया जांच, उपचार और पोषण व्यवस्था को मजबूत करने की बात सामने आ चुकी है। अधिकारियों के स्तर पर प्रभावित गांवों में घर-घर सर्वे और स्वास्थ्य जांच की कार्रवाई भी की जा रही है।
लेकिन सवाल यह है कि लगातार सामने आ रहे गंभीर मामलों के बावजूद बच्चों की हालत इतनी बिगड़ने से पहले उन्हें पर्याप्त उपचार और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा क्यों नहीं मिल पा रही?
अब मौतों की संख्या नहीं, हर मौत का कारण चाहिए
26 बच्चों की मौत का आंकड़ा सामने आने के बाद अब सिर्फ संख्या बताना पर्याप्त नहीं है। जरूरी है कि प्रत्येक बच्चे की मेडिकल हिस्ट्री, बीमारी के लक्षण, पोषण स्थिति, टीकाकरण रिकॉर्ड, उपचार, रेफरल और मृत्यु के चिकित्सकीय कारण का स्वतंत्र रूप से परीक्षण किया जाए।
साथ ही यह भी पता लगाया जाना चाहिए कि प्रभावित परिवारों को प्राथमिक स्तर पर कितनी स्वास्थ्य सुविधा मिली और गंभीर अवस्था में अस्पताल पहुंचने में कितना समय लगा।
माही की मौत ने एक बार फिर वही सवाल सामने खड़ा कर दिया है—क्या दूरस्थ बैगा बस्तियों तक स्वास्थ्य व्यवस्था समय पर पहुंच पा रही है, या इलाज की कोशिश तब शुरू होती है जब बीमारी बेहद गंभीर हो चुकी होती है?
अब जरूरत संवेदना के साथ-साथ पारदर्शी जांच, जवाबदेही और स्थायी स्वास्थ्य व्यवस्था की है, ताकि बैगा परिवारों को अपने बच्चों के इलाज के लिए बार-बार लंबी दूरी तय न करनी पड़े और किसी और मासूम की जिंदगी इलाज की तलाश में न हार जाए।
Legal Disclaimer: This report is based on information received from local sources; the reported death count and circumstances require official verification and medical confirmation by competent authorities.