कार्रवाई से पहले गायब मशीनें! बरही में रेत माफिया की ‘डिजिटल रेकी’ पर बड़ा सवाल.
Machines Vanish Before Action! Big Questions Over the Sand Mafia’s ‘Digital Surveillance’ Network in Barhi.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News
MP संवाद समाचार, कटनी/भोपाल। कटनी। जीवनदायिनी नदियों को बचाने के लिए नियम-कायदे बनाए गए हैं, लेकिन बरही क्षेत्र में कथित अवैध रेत खनन और परिवहन को लेकर सामने आई जानकारी ने प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि रेत खनन से जुड़े लोग कार्रवाई से बचने के लिए केवल घाटों पर ही निगरानी नहीं रखते, बल्कि सरकारी दफ्तरों और अधिकारियों की गतिविधियों पर भी नजर रखते हैं।
सूत्रों के अनुसार, बरही थाना, तहसील कार्यालय और एसडीएम कार्यालय के आसपास कथित रूप से ऐसे लोग सक्रिय रहते हैं, जो अधिकारियों की आवाजाही पर नजर रखते हैं। अधिकारी कब कार्यालय से निकलते हैं और किस दिशा में जाते हैं, इसकी सूचना कथित तौर पर आगे पहुंचाई जाती है।
यदि यह जानकारी जांच में सही साबित होती है तो यह केवल अवैध खनन का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्रवाई की गोपनीयता और कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बन सकता है।
अधिकारी निकलते हैं, उससे पहले घाट हो जाता है खाली?
कथित नेटवर्क का सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्रवाई करने पहुंचने वाली टीम को कई बार मौके पर अपेक्षित गतिविधियां क्यों नहीं मिलतीं? आरोप है कि अधिकारियों की टीम पहुंचने से पहले ही खनन स्थल से मजदूर, पोकलेन या जेसीबी मशीनें और ट्रैक्टर-ट्रॉलियां हटा दी जाती हैं।
इसके बाद कार्रवाई की टीम के सामने कथित तौर पर खाली घाट और वाहनों के पहियों के निशान ही रह जाते हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और यह जांच का विषय है कि कार्रवाई से पहले सूचना लीक होने की वास्तविक वजह क्या है।
अगर किसी अभियान की जानकारी पहले ही संबंधित लोगों तक पहुंच रही है, तो प्रशासन को अपनी कार्रवाई की रणनीति और गोपनीयता दोनों की समीक्षा करने की जरूरत है।
नदियों की छाती छलनी, निगरानी तंत्र पर सवाल
अवैध रेत खनन सिर्फ राजस्व का नुकसान नहीं है। नदी के प्राकृतिक प्रवाह, तटों और पर्यावरण पर भी इसका असर पड़ सकता है। ऐसे में बरही क्षेत्र में यदि नियमों के विपरीत रेत खनन हो रहा है तो इसकी निष्पक्ष जांच और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।
सवाल यह भी है कि यदि प्रशासनिक अमला कार्रवाई के लिए निकलने से पहले ही गतिविधियों की जानकारी बाहर पहुंच जाती है, तो खनिज और राजस्व विभाग अवैध खनन रोकने के लिए किस तरह की निगरानी व्यवस्था अपना रहा है?
उपसंचालक खनिज विभाग रत्नेश दीक्षित ने कहा, “बरसात के मौसम में भी अगर रेत निकाली जा रही है तो निश्चित रूप से कार्रवाई की जाएगी। जानकारी लेकर कार्रवाई की जाएगी।”
वहीं बरही तहसीलदार आदित्य द्विवेदी ने कहा, “रेत के अवैध उत्खनन को लेकर जानकारी ली जाएगी और खनिज विभाग के साथ मिलकर कार्रवाई की जाएगी।”
अब सवाल—माफिया पर कार्रवाई होगी या सिर्फ आश्वासन?
बरही में कथित अवैध रेत खनन और अधिकारियों की गतिविधियों पर निगरानी के आरोपों ने प्रशासन के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब जरूरत केवल बयान देने की नहीं, बल्कि अवैध उत्खनन, परिवहन और कथित सूचना-लीक नेटवर्क की निष्पक्ष जांच की है।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इस पूरे नेटवर्क की भूमिका सामने लाना जरूरी होगा। वहीं यदि आरोप गलत हैं तो प्रशासन को भी तथ्य सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
क्योंकि सवाल सिर्फ रेत का नहीं है—सवाल नदियों के भविष्य और कानून के राज का है।
Legal Disclaimer: This report is based on allegations, source inputs and official statements; claims regarding illegal mining or surveillance remain subject to independent verification and competent authority investigation.