हाईकोर्ट ने रास्ता साफ किया, फिर भी फैसला अटका! उदय गौतम ट्रांसफर केस में जवाबदेही किसकी?
High Court Cleared the Way, Yet the Decision Remains Pending! Who Is Accountable in Uday Gautam’s Transfer Case?

Sub Editor Desk, MP Samwad News, Bhopal.
MP संवाद समाचार, सागर/भोपाल। जिला पंचायत सागर में पदस्थ संविदा परियोजना अधिकारी उदय सिंह गौतम के स्थानांतरण का मामला अब प्रशासनिक आदेश से आगे बढ़कर न्यायालयीन प्रक्रिया और विभागीय जवाबदेही का सवाल बन गया है। शासन द्वारा स्थानांतरण आदेश जारी किए जाने के बाद MP संवाद समाचार ने संबंधित अधिकारियों को ईमेल द्वारा लिखित शिकायत भेजकर आदेश के पालन और अधिकारी को कार्यमुक्त किए जाने की मांग की थी।
लेकिन शिकायत के बाद भी मामले में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने और बाद में सामने आई न्यायालयीन प्रक्रिया ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है—जब MP संवाद समाचार ने समय रहते प्रशासन को पूरे मामले से अवगत करा दिया था, तो शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई? और हाईकोर्ट द्वारा निर्धारित समयसीमा के बाद भी आयुक्त पंचायती राज स्तर पर प्रकरण का निराकरण क्यों नहीं हुआ?
MP संवाद ने सबसे पहले उठाया था तबादला आदेश के पालन का सवाल
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी आदेश क्रमांक डीआरजी/एफएन-813/2026/10372, दिनांक 16 जून 2026 के माध्यम से जिला पंचायत सागर में पदस्थ संविदा परियोजना अधिकारी उदय सिंह गौतम का स्थानांतरण जिला पंचायत राजगढ़ किया गया था।
इस आदेश के बाद MP संवाद समाचार ने कलेक्टर सागर को लिखित शिकायत/निवेदन भेजा था।
शिकायत में शासन के स्थानांतरण आदेश का हवाला देते हुए पूछा गया था कि आदेश जारी होने के बावजूद संबंधित अधिकारी को कार्यमुक्त क्यों नहीं किया गया।
MP संवाद समाचार ने प्रशासन से मांग की थी कि—
- शासन के स्थानांतरण आदेश के अनुसार श्री उदय गौतम को कार्यमुक्त किया जाए।
- यदि कार्यमुक्ति में कोई प्रशासनिक बाधा है तो उसकी लिखित जानकारी दी जाए।
- स्थानांतरण आदेश के पालन में हुई देरी की जांच की जाए।
- शासन के आदेश का समयबद्ध पालन सुनिश्चित किया जाए।
लेकिन MP संवाद समाचार के अनुसार इस शिकायत पर आज तक कोई स्पष्ट एवं प्रभावी जवाब प्राप्त नहीं हुआ है।
शिकायत के बाद सामने आई हाईकोर्ट की लड़ाई
मामले में इसके बाद एक महत्वपूर्ण न्यायालयीन घटनाक्रम सामने आया।
MP संवाद समाचार द्वारा संबंधित अधिकारियों को भेजे गए दूसरे ईमेल में यह जानकारी दी गई थी कि उदय सिंह गौतम ने अपने स्थानांतरण आदेश को चुनौती देते हुए रिट पिटीशन क्रमांक 22005/2026 दिनांक 19 जून 2026 को हाईकोर्ट में प्रस्तुत की है।
इस याचिका में उदय सिंह गौतम पिटीशनर हैं, जबकि स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश, कमिश्नर पंचायत राज, कलेक्टर सागर तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत सागर को प्रतिवादी बनाया गया था।
MP संवाद समाचार ने यह जानकारी संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में इसलिए दी थी ताकि प्रशासनिक निर्णय लेते समय न्यायालयीन स्थिति को भी ध्यान में रखा जा सके।
हाईकोर्ट ने तय की थी समयसीमा, अब एक महीने से ज्यादा का सवाल
इस पूरे मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू हाईकोर्ट के आदेश से जुड़ा है।
उपलब्ध न्यायालयीन आदेश के अनुसार याचिका को डिस्पोज्ड किया गया और उदय गौतम को एक सप्ताह के भीतर आयुक्त पंचायती राज के समक्ष अपनी अपील प्रस्तुत करने तथा आयुक्त पंचायती राज को तीन सप्ताह के भीतर प्रकरण का निराकरण करने का निर्देश दिए जाने की जानकारी है।
इसके साथ ही आदेश में यह भी कहा गया कि किसी भी स्थिति में कंडीशनल स्टे एक माह से अधिक नहीं होगा।
अब MP संवाद समाचार द्वारा उठाया गया सवाल सीधे विभागीय जवाबदेही से जुड़ता है।
यदि न्यायालय द्वारा निर्धारित समयसीमा के भीतर आयुक्त पंचायती राज को प्रकरण का निराकरण करना था, तो एक माह से अधिक समय बीतने के बाद भी अंतिम निर्णय की स्थिति क्या है?
क्या अपील निर्धारित समय में प्रस्तुत हुई?
क्या आयुक्त पंचायती राज के समक्ष सुनवाई पूरी हुई?
क्या कोई अंतिम आदेश जारी हुआ?
और यदि आदेश जारी नहीं हुआ तो न्यायालय द्वारा निर्धारित समयसीमा का पालन क्यों नहीं हुआ?
इन सवालों का जवाब अब संबंधित विभाग को देना चाहिए।
पुराना ट्रांसफर विवाद भी रहा है हाईकोर्ट में
उदय गौतम का स्थानांतरण इससे पहले भी न्यायालयीन विवाद का विषय रहा है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने वर्ष 2022 में रिट पिटीशन क्रमांक 24759/2022 के माध्यम से 6 अगस्त 2021 को जारी स्थानांतरण आदेश को चुनौती दी थी।
इस मामले में हाईकोर्ट ने 4 नवंबर 2022 को स्थानांतरण आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगाई थी। बाद में न्यायालय ने विवादित स्थानांतरण आदेश को निरस्त करते हुए याचिका का अंतिम निराकरण किया था।
हालांकि, न्यायालय ने प्रशासनिक आवश्यकता होने पर सक्षम अधिकारी को नियमानुसार भविष्य में नया स्थानांतरण आदेश जारी करने की स्वतंत्रता भी दी थी।
यही कारण है कि वर्ष 2026 में जारी नया स्थानांतरण आदेश और उसके बाद की न्यायालयीन प्रक्रिया विशेष महत्व रखती है।
MP संवाद का सवाल: शिकायत पर कार्रवाई हुई तो रिकॉर्ड कहां है?
इस पूरे मामले में MP संवाद समाचार स्वयं शिकायतकर्ता है। इसलिए सवाल किसी अज्ञात शिकायतकर्ता के आरोपों का नहीं, बल्कि MP संवाद द्वारा संबंधित अधिकारियों को भेजे गए लिखित ईमेल और उस पर हुई प्रशासनिक कार्रवाई का है।
MP संवाद ने समय रहते प्रशासन को—
- स्थानांतरण आदेश की जानकारी दी,
- कार्यमुक्ति को लेकर सवाल उठाया,
- न्यायालय में दायर याचिका की जानकारी दी,
- और बाद में न्यायालयीन प्रक्रिया की स्थिति भी प्रशासन के संज्ञान में लाई।
अब प्रशासन से सीधा सवाल है—
MP संवाद की शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई?
क्या शिकायत की जांच हुई?
क्या कोई लिखित जवाब जारी किया गया?
क्या उदय गौतम को स्थानांतरण आदेश के अनुसार कार्यमुक्त किया गया?
और सबसे महत्वपूर्ण—
क्या आयुक्त पंचायती राज ने हाईकोर्ट के निर्देश के अनुरूप प्रकरण का निर्धारित समयसीमा में निराकरण किया?
अब प्रशासन को स्पष्ट करना होगा पूरा घटनाक्रम
यह मामला किसी व्यक्ति विशेष को दोषी ठहराने का नहीं, बल्कि शासन के आदेश, न्यायालयीन निर्देश और प्रशासनिक जवाबदेही की स्थिति स्पष्ट करने का है।
यदि संबंधित विभाग ने न्यायालय के आदेश के अनुरूप समयसीमा में प्रकरण का निराकरण कर दिया है, तो उसका आधिकारिक आदेश सामने आना चाहिए।
यदि निर्णय लंबित है, तो लंबित रहने का कारण भी स्पष्ट किया जाना चाहिए।
और यदि MP संवाद समाचार द्वारा भेजी गई शिकायत पर कार्रवाई हुई है, तो उसकी जानकारी भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
अब सवाल केवल उदय गौतम के तबादले का नहीं है—सवाल यह है कि शासन का आदेश, पत्रकारिता की शिकायत और हाईकोर्ट की समयसीमा, तीनों के बीच प्रशासनिक जवाबदेही कहां खड़ी है?
MP संवाद समाचार इस मामले में संबंधित विभाग, कलेक्टर सागर और आयुक्त पंचायती राज का आधिकारिक पक्ष प्रकाशित करने के लिए उपलब्ध रहेगा।
Legal Disclaimer
This report is based on official correspondence and judicial proceedings; allegations are subject to verification and final determination by competent authorities.