टॉयलेट नहीं तो खुले में लघुशंका! मंडला के बाजारों में सिस्टम की कैसी ‘स्वच्छता’
No Toilets, Forced to Urinate in Public! What Kind of ‘Cleanliness’ Is This in Mandla’s Markets?

Special Correspondent, Mandla MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, मंडला। मंडला शहर के सबसे व्यस्त व्यावसायिक इलाकों में सार्वजनिक प्रसाधनों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने से स्थानीय व्यापारियों, ग्राहकों, महिलाओं, बुजुर्गों और दूर-दराज से आने वाले लोगों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शहर में स्वच्छता और बेहतर नागरिक सुविधाओं के दावे किए जाते हैं, लेकिन प्रमुख बाजार क्षेत्रों में सार्वजनिक शौचालय और पेशाबघरों का अभाव इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, बस स्टैंड से चिलमन चौक, चिलमन चौक से कृषि उपज मंडी, रेडक्रॉस से नेहरू स्मारक, बैगा-बैगी चौक से लालीपुर और लालीपुर से बस स्टैंड तक कई प्रमुख मार्गों पर पुरुषों और महिलाओं के लिए पर्याप्त सार्वजनिक प्रसाधन उपलब्ध नहीं हैं।
बाजार में घंटों रहने वालों के लिए बुनियादी सुविधा तक नहीं!
जानकारी के अनुसार, जिन व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में प्रसाधन की सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां दुकानदारों और ग्राहकों को मजबूरन बस स्टैंड, स्टेडियम मार्ग स्थित सुलभ शौचालय या पुरानी तहसील क्षेत्र तक जाना पड़ता है। यह स्थिति विशेष रूप से महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और दूर-दराज से आने वाले ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस बाजार क्षेत्र में प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही होती है, वहां सार्वजनिक शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा की पर्याप्त व्यवस्था आखिर क्यों नहीं है? क्या नागरिक सुविधाओं की योजना बनाते समय शहर के प्रमुख बाजारों और सार्वजनिक स्थलों की वास्तविक जरूरतों का आकलन नहीं किया गया?
शौचालय नहीं तो सड़क किनारे खुले में लघुशंका—गंदगी और दुर्गंध से लोग परेशान
चिलमन चौक से तहसील मार्ग और कृषि कार्यालय के बीच सार्वजनिक प्रसाधन नहीं होने के कारण कुछ लोगों के सड़क किनारे खुले में लघुशंका करने की शिकायत सामने आती रही है। इससे क्षेत्र में गंदगी और दुर्गंध की समस्या बनी रहती है तथा महिलाओं को भी असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है।
इसी तरह रेडक्रॉस से बैगा-बैगी चौक और नेहरू स्मारक क्षेत्र तक भी सार्वजनिक प्रसाधनों की कमी बताई जा रही है। बैगा-बैगी चौक स्थित बंजर क्लब के सामने लोग खुले में लघुशंका करने को मजबूर होने की बात कही जा रही है। यह इलाका न्यायालय, कलेक्ट्रेट, जिला पंचायत सहित कई महत्वपूर्ण शासकीय कार्यालयों से जुड़ा है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में नागरिक और ग्रामीण पहुंचते हैं।
व्यापारी संतोष तिवारी के अनुसार, पूर्व में नगरपालिका द्वारा यहां प्रसाधन की व्यवस्था के लिए एक डिब्बा रखा गया था, लेकिन कुछ समय बाद उसे हटा दिया गया। इसके बाद से लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
नगरपालिका की व्यवस्था पर सवाल—क्या अब बनेगा आधुनिक सार्वजनिक सुविधा केंद्र?
चिलमन चौक से पड़ाव मार्ग होते हुए कृषि उपज मंडी तक भी सार्वजनिक प्रसाधनों की कमी की शिकायत है। इसके कारण लोग आसपास की गलियों का सहारा लेने को मजबूर होते हैं, जिससे क्षेत्र की स्वच्छता व्यवस्था भी प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नगरपालिका प्रशासन को इस समस्या की जानकारी होने के बावजूद अब तक मुख्य बाजार क्षेत्र में पर्याप्त सार्वजनिक प्रसाधनों की व्यवस्था नहीं हो सकी है। सवाल यह है कि स्वच्छ और व्यवस्थित शहर की कल्पना केवल सफाई अभियान तक सीमित रहेगी या नागरिकों को जरूरी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी?
नगरवासियों ने मांग की है कि मुख्य बाजार क्षेत्र के प्रमुख स्थानों पर पुरुषों और महिलाओं के लिए पृथक, स्वच्छ और आधुनिक सार्वजनिक शौचालय एवं पेशाबघर बनाए जाएं। साथ ही इनके नियमित रखरखाव, साफ-सफाई, पानी और प्रकाश की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि नागरिकों को सम्मानजनक सुविधा मिल सके और खुले में लघुशंका की समस्या पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सके।
इनका कहना है
“नगर में सार्वजनिक सुविधा घर (सुलभ कॉम्प्लेक्स) एवं पेशाबघरों की कमी के कारण नागरिकों, व्यापारियों, महिलाओं, बुजुर्गों, बच्चों और बाहर से आने वाले लोगों को वर्षों से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रमुख बाजारों और सार्वजनिक स्थलों पर पर्याप्त शौचालय व्यवस्था नहीं होने से लोगों को असुविधा होती है। नगर के प्रमुख स्थानों पर आधुनिक सार्वजनिक शौचालय एवं पेशाबघर स्थापित कर उनके नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।”
अखिलेश सोनी
समाजसेवी, मंडला
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