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बलि का बकरा’ या घोटाले की असली कड़ी? हर्ष राइस मिल के पार्टनर की गिरफ्तारी से उठे सवाल.

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Scapegoat’ or the Real Link to the Scam? Questions Arise After the Arrest of Harsh Rice Mill’s Partner.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। सरकारी चावल की कथित हेराफेरी की जांच अब लगातार नए मोड़ ले रही है। एसआईटी ने मामले में गिरफ्तार हर्ष राइस मिल के बिजनेस पार्टनर विनोद शर्मा को टेकाड़ी स्थित हर्ष राइस मिल ले जाकर साक्ष्य जुटाए हैं। पुलिस ने यहां वित्तीय दस्तावेज, लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण कागजात खंगाले तथा आवश्यक साक्ष्य एकत्रित किए।

इधर, मामले में नंदगोपाल राइस मिल, सिवनी के संचालक सोनू जैन की गिरफ्तारी ने जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। बताया जा रहा है कि सरकारी चावल की आवाजाही से जुड़े ट्रकों की पड़ताल के दौरान जांच एजेंसी को कई अहम कड़ियां मिली हैं।

लेकिन इस पूरी कार्रवाई के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या जांच की आंच कथित नेटवर्क के अंतिम छोर तक पहुंचेगी, या कार्रवाई कुछ गिरफ्तारियों तक ही सीमित रह जाएगी?

‘बलि का बकरा’ थ्योरी ने पकड़ा जोर? पार्टनर गिरफ्तार, कथित मुख्य कड़ियों पर कार्रवाई का इंतजार

मामले में हर्ष राइस मिल के बिजनेस पार्टनर विनोद शर्मा की गिरफ्तारी के बाद स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं पूरे मामले का भार एक व्यक्ति पर डालकर बाकी कथित जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश तो नहीं हो रही। हालांकि, इस ‘बलि का बकरा’ थ्योरी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

बताया जा रहा है कि हर्ष राइस मिल से जुड़े वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों की जांच के बाद कई नए सवाल सामने आए हैं। पुलिस द्वारा विनोद शर्मा को मिल परिसर में ले जाकर साक्ष्य जुटाए जाने के बाद अब जांच एजेंसी की नजर कथित तौर पर उन सभी लोगों की भूमिका पर है, जिनका नाम या संबंध इस कारोबारी नेटवर्क से जुड़ता है।

कुछ स्थानीय चर्चाओं में भाजपा नेता से जुड़े परिवार के सदस्यों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति का किसी राजनीतिक दल से संबंध होना या किसी राइस मिल में हिस्सेदारी होना अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं है। संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का निर्धारण केवल जांच में सामने आए साक्ष्यों और न्यायालयीन प्रक्रिया के आधार पर ही किया जा सकता है।

यही वजह है कि अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एसआईटी जांच को सभी संबंधित पक्षों तक समान रूप से ले जाएगी और यदि किसी की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करेगी?

हर्ष राइस मिल पहुंची पुलिस, वित्तीय लेन-देन के खुल रहे राज?

सरकारी चावल की कथित हेराफेरी के मामले में गिरफ्तार विनोद शर्मा से पूछताछ के बाद एसआईटी शनिवार को उसे लेकर टेकाड़ी स्थित हर्ष राइस मिल पहुंची। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर वित्तीय दस्तावेज, लेन-देन के रिकॉर्ड और अन्य महत्वपूर्ण कागजात की जांच की तथा आवश्यक साक्ष्य जुटाए।

इसी क्रम में संचेती राइस मिल से जुड़े राजेश संचेती से भी पूछताछ कर जानकारी और साक्ष्य जुटाए जाने की बात सामने आई है।

सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान ऑनलाइन लेनदेन से जुड़े कुछ डिजिटल साक्ष्य भी सामने आए हैं। इनकी जांच के जरिए राइस मिलों और एथनॉल प्लांट के बीच संभावित आर्थिक संबंधों की पड़ताल की जा रही है। हालांकि, इन साक्ष्यों की वास्तविक प्रकृति और उनका कानूनी महत्व जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

एक और आरोपी गिरफ्तार, नंदगोपाल राइस मिल के संचालक पर भी कार्रवाई

सरकारी चावल की कथित हेराफेरी के मामले में जांच का दायरा बढ़ाते हुए सिवनी स्थित नंदगोपाल राइस मिल के संचालक सोनू जैन को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। उनकी गिरफ्तारी को जांच में एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, 3 जून को नवेगांव एफसीआई से चावल से भरे तीन ट्रक एवीजे एथनॉल प्लांट के लिए रवाना हुए थे। इनमें से एक ट्रक के वारासिवनी स्थित संचेती राइस मिल और दो ट्रकों के सिवनी स्थित नंदगोपाल राइस मिल में खाली होने की बात सामने आई थी। पुलिस द्वारा नंदगोपाल राइस मिल से दो खाली ट्रक जब्त किए जाने के बाद मामले की जांच में एक नई कड़ी जुड़ने की जानकारी सामने आई।

इस गिरफ्तारी के बाद भी मामले में शामिल बताए जा रहे अन्य संदिग्धों और आरोपियों की भूमिका को लेकर जांच जारी है। अब देखना यह है कि एसआईटी आगे किन लोगों तक पहुंचती है और कथित नेटवर्क की पूरी तस्वीर कब सामने आती है।

200 से ज्यादा लोगों से पूछताछ, जांच का दायरा कई राज्यों तक

एसआईटी अब तक 200 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है। बताया जा रहा है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोगों को कंट्रोल रूम बुलाकर उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच का दायरा बालाघाट के अलावा सिवनी, छिंदवाड़ा, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़ तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है।

ट्रक चालकों, ट्रांसपोर्टरों, राइस मिलर्स और वेयरहाउस संचालकों से पूछताछ कर उनके बयानों का क्रॉस-वेरिफिकेशन किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, कुछ ट्रक चालकों के फरार होने और मोबाइल नंबर बंद होने की जानकारी भी सामने आई है। यदि यह जानकारी जांच में पुष्ट होती है, तो यह पूरे मामले में किसी बड़े नेटवर्क की संभावित भूमिका की ओर संकेत कर सकती है।

फिलहाल सरकारी चावल की कथित हेराफेरी की जांच जारी है। अब निगाहें एसआईटी की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। क्या जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित रहेगी, या कथित नेटवर्क से जुड़े हर व्यक्ति की भूमिका सामने आएगी? यही वह सवाल है जिसका जवाब जांच की अगली कड़ियों से मिलेगा।

Legal Disclaimer

This report presents allegations and investigation-based information; guilt is not established unless proven through due legal process and competent judicial authority.

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