जबलपुर का जल संकट! 80% पाइपलाइनें नालियों में, NGT ने सिस्टम को लगाई फटकार.
Jabalpur Water Crisis! 80% of Pipelines Run Through Drains, NGT Pulls Up the System.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Jabalpur, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, जबलपुर/भोपाल। जबलपुर शहर की पेयजल व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, शहर की लगभग 80 प्रतिशत पेयजल पाइपलाइनें नालियों के बीच से गुजर रही हैं, जबकि बताया गया है कि लगभग 47 प्रतिशत पानी पीने योग्य नहीं पाया गया है। इस मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कड़ा रुख अपनाते हुए मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) को दो सप्ताह के भीतर संयुक्त निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया है।
NGT के आदेश के बावजूद जांच में देरी
मंच के अनुसार, इस मामले में पूर्व सुनवाई के दौरान एनजीटी ने एक समिति गठित कर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया था और एक माह के भीतर निरीक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। आरोप है कि निर्धारित अवधि में रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई।
10 जुलाई को हुई सुनवाई में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कथित तौर पर कहा कि नगर निगम और जिला प्रशासन के अपेक्षित सहयोग के अभाव में संयुक्त निरीक्षण नहीं हो सका।
‘असहयोग’ को NGT ने बताया गंभीर
दस्तावेज के अनुसार, एनजीटी की पीठ ने कथित प्रशासनिक असहयोग को गंभीर मानते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दो सप्ताह के भीतर निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का अंतिम निर्देश दिया है।
साथ ही, एनजीटी रजिस्ट्री को निर्देशित किया गया कि वह कलेक्टर जबलपुर और नगर निगम आयुक्त को आदेश की प्रति भेजे, ताकि संबंधित विभाग निरीक्षण प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करें।
40-50 वर्ष पुरानी पाइपलाइन पर भी सवाल
याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से यह भी दावा किया गया कि शहर की कई पेयजल पाइपलाइनें 40 से 50 वर्ष पुरानी हैं और जर्जर स्थिति में हैं। आरोप है कि इनके रखरखाव एवं प्रतिस्थापन के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए, जिससे पेयजल की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
जनस्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा
यदि पाइपलाइनें वास्तव में नालियों के संपर्क में हैं या क्षतिग्रस्त हैं, तो इससे पेयजल दूषित होने का खतरा बढ़ सकता है। अब सभी की निगाहें प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच रिपोर्ट और संबंधित विभागों की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।
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This report is based on publicly circulated documents and stated claims. Official findings, investigations, and judicial proceedings may further clarify the facts.