₹1160 करोड़ के सरकारी चावल पर बड़ा सवाल! इथेनॉल प्लांट की जगह राइस मिल तक.
Big Questions Over ₹1,160 Crore Worth of Government Rice! From an Ethanol Plant to a Rice Mill.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट/भोपाल। देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol) को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार लगातार नीतिगत प्रोत्साहन दे रही है। इसी नीति के तहत मध्य प्रदेश में भी चावल आधारित इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा दिया गया। लेकिन अब इसी व्यवस्था से जुड़ा एक बहुचर्चित मामला जांच एजेंसियों के रडार पर है।
जांच से जुड़े दस्तावेजों एवं उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकारी चावल के आवंटन, परिवहन और उपयोग को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि संबंधित चावल फोर्टीफाइड (Fortified) चावल था, जिसका उपयोग सामान्यतः पोषण योजनाओं में किया जाता है। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
सरकार रियायती दर पर देती है चावल
राज्य सरकार का तर्क है कि गोदामों में लंबे समय तक अनाज रखने से उसकी गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है तथा नई फसल के भंडारण के लिए स्थान उपलब्ध कराना भी आवश्यक होता है। इसी उद्देश्य से इथेनॉल उत्पादन इकाइयों को निर्धारित नीति के तहत रियायती दरों पर चावल उपलब्ध कराया जाता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार—
- सरकार पर चावल की कुल लागत लगभग ₹3,900–₹4,000 प्रति क्विंटल आती है।
- जबकि इथेनॉल इकाइयों को यह चावल लगभग ₹2,320 प्रति क्विंटल की दर से उपलब्ध कराया जाता है।
21 इथेनॉल प्लांट्स को आवंटित हुआ लाखों टन चावल
FCI के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश के 21 ग्रेन आधारित इथेनॉल प्लांटों को छह माह के दौरान लगभग 2.11 लाख मीट्रिक टन चावल आवंटित किया गया।
इनमें प्रमुख आवंटन इस प्रकार बताए गए हैं—
- गुलशन पॉलीयोल्स, छिंदवाड़ा – 48,162 मीट्रिक टन
- विसाग बायोफ्यूल्स, बालाघाट – 17,880 मीट्रिक टन
- एवीजे एग्रीको, छिंदवाड़ा – 19,665 मीट्रिक टन
प्रदेश में वर्तमान में 36 इथेनॉल प्लांट संचालित हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता लगभग 143 करोड़ लीटर बताई जाती है।
तीन ट्रकों से खुली जांच की पहली कड़ी
उपलब्ध जांच विवरण के अनुसार, 2 जून को बालाघाट के नवेगांव वेयरहाउस से एवीजे इथेनॉल प्लांट, छिंदवाड़ा के लिए तीन ट्रकों में चावल भेजा गया था।
रिकॉर्ड के अनुसार इस चावल का उपयोग इथेनॉल निर्माण में होना था। लेकिन अगले ही दिन 3 जून को इन ट्रकों में से एक ट्रक सांचेती राइस मिल, बालाघाट में पाया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, शेष दो ट्रकों की आवाजाही भी जांच का विषय बनी हुई है।
SIT जांच का दायरा लगातार बढ़ रहा है
मामले के सामने आने के बाद विशेष जांच दल (SIT) ने जांच शुरू की। अब तक 40 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है, जिनमें राइस मिलर्स, इथेनॉल प्लांट संचालक, ट्रांसपोर्टर तथा अन्य संबंधित व्यक्ति शामिल बताए जा रहे हैं।
जांच के दौरान अब तक चार आरोपियों की गिरफ्तारी तथा 12 ट्रकों की जब्ती की कार्रवाई की जा चुकी है।
शुरुआत में जांच केवल बालाघाट, छिंदवाड़ा और सिवनी तक सीमित थी, लेकिन अब इसका दायरा प्रदेश के अन्य इथेनॉल प्लांटों एवं राइस मिलों तक भी बढ़ाया जा रहा है।
जांच से मिलेंगे जवाब
पूरे मामले में कई महत्वपूर्ण प्रश्न अभी जांच के अधीन हैं—
- क्या आवंटित चावल का उपयोग वास्तव में इथेनॉल उत्पादन में हुआ?
- क्या निर्धारित प्रक्रिया एवं अनुबंध की शर्तों का पालन किया गया?
- क्या चावल के परिवहन एवं उपयोग में किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ?
- यदि अनियमितता हुई, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी बनती है?
इन सभी प्रश्नों का उत्तर SIT की अंतिम जांच रिपोर्ट और आगे की वैधानिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
Disclaimer
यह समाचार उपलब्ध दस्तावेजों, आधिकारिक अभिलेखों एवं विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित है। मामला SIT जांचाधीन है। किसी व्यक्ति, संस्था या कंपनी की जिम्मेदारी अथवा दोष का अंतिम निर्धारण केवल सक्षम न्यायालय या प्राधिकारी द्वारा किया जाएगा।