सरकारी चावल घोटाला: CCTV फुटेज नहीं मिला, क्या मिटाए गए सबूत?
Government Rice Scam: CCTV Footage Missing — Were Evidence Destroyed?

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, बालाघाट।
बालाघाट। सरकारी चावल हेराफेरी मामले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। विशेष जांच दल (SIT) ने एक बार फिर छिंदवाड़ा स्थित संबंधित एथेनॉल प्लांट और उससे जुड़े वेयरहाउस में पहुंचकर जांच की। जांच के दौरान कथित रूप से कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए हैं, जिनमें सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होना और आरोपियों के बयानों में विरोधाभास प्रमुख बताए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियां अब केवल चावल की कथित हेराफेरी ही नहीं, बल्कि संभावित डिजिटल साक्ष्यों और दस्तावेजों की भी गहन पड़ताल कर रही हैं।
रिमांड में मिले बयानों के बाद दोबारा पहुंची SIT
जानकारी के अनुसार रिमांड पर चल रहे प्लांट प्रतिनिधि राहुल प्रताप एवं सुपरवाइजर राकेश श्रीवास्तव से पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर एसआईटी ने दूसरी बार संबंधित एथेनॉल प्लांट एवं साईं कृपा वेयरहाउस का निरीक्षण किया।
बताया जा रहा है कि पहली जांच के दौरान उपलब्ध रिकॉर्ड और आरोपियों के बयानों में कुछ बिंदुओं पर अंतर मिलने के बाद पुलिस ने दोबारा जांच करना आवश्यक समझा।
CCTV फुटेज नहीं मिलने से बढ़े सवाल
सूत्रों के मुताबिक जांच टीम को संबंधित परिसर से अपेक्षित सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं हो सका। इस कारण जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि फुटेज उपलब्ध क्यों नहीं है और क्या रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया था।
हालांकि, अभी तक पुलिस या एसआईटी की ओर से यह आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है कि फुटेज नष्ट किया गया, डिलीट हुआ या तकनीकी कारणों से उपलब्ध नहीं है। इस पहलू की जांच जारी है।
वेयरहाउस की भूमिका भी जांच के घेरे में
जांच में यह भी पड़ताल की जा रही है कि एफसीआई से जारी चावल की आपूर्ति निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप हुई थी या नहीं।
सूत्रों का दावा है कि जांच एजेंसियों को एक रजिस्टर मिला है, जिसमें वाहनों की आवाजाही दर्ज है। अब इसी रिकॉर्ड का अन्य दस्तावेजों, परिवहन विवरण और संबंधित अभिलेखों से मिलान किया जा रहा है।
राइस मिलर्स भी जांच के दायरे में
सूत्रों के अनुसार बालाघाट, वारासिवनी, कटंगी, सिवनी और छिंदवाड़ा के कुछ राइस मिलर्स से भी पूछताछ की संभावना है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक जांच के दायरे में आए सभी लोगों को आरोपी घोषित नहीं किया है।
जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही हैं।
रिमांड बढ़ने की चर्चा, आधिकारिक पुष्टि का इंतजार
जानकारी मिल रही है कि गिरफ्तार आरोपियों की रिमांड अवधि बढ़ाए जाने की प्रक्रिया अपनाई गई है, हालांकि इस संबंध में अभी अधिकृत पुष्टि शेष है।
माना जा रहा है कि पूछताछ के अगले चरण में जांच एजेंसियों को मामले से जुड़े और महत्वपूर्ण तथ्य प्राप्त हो सकते हैं।
जांच की दिशा अब और व्यापक
सरकारी चावल हेराफेरी की जांच अब केवल परिवहन तक सीमित नहीं रह गई है। जांच एजेंसियां परिवहन रिकॉर्ड, वेयरहाउस संचालन, दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका सहित पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं।
यदि जांच में नए साक्ष्य सामने आते हैं तो मामले में और लोगों की भूमिका की भी जांच की जा सकती है।
MP संवाद का सवाल
यदि सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार चावल का परिवहन हुआ था, तो उससे जुड़े डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित क्यों नहीं मिले? क्या यह केवल रिकॉर्ड प्रबंधन की कमी है, या जांच में सामने आने वाला कोई बड़ा तथ्य?
(नोट: यह समाचार उपलब्ध दस्तावेजों, सूत्रों से प्राप्त जानकारी एवं जांच से जुड़े तथ्यों पर आधारित है। जांच जारी है। किसी भी व्यक्ति की भूमिका अंतिम रूप से न्यायालय अथवा सक्षम जांच एजेंसी के निष्कर्षों के अधीन होगी। संबंधित पक्ष का स्पष्टीकरण प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)