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सवालों पर ताला? DEO के आदेश से स्कूलों में पत्रकारों की एंट्री बंद.

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Questions Under Lock? DEO Order Bars Journalists from Entering Schools.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Bhopal, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, भोपाल।

भोपाल/सिंगरौली। मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) द्वारा जारी एक आदेश ने पत्रकारिता, पारदर्शिता और सरकारी संस्थानों की जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जारी निर्देशों के अनुसार अब बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के कोई भी पत्रकार अथवा सामान्य नागरिक शासकीय विद्यालयों में प्रवेश या निरीक्षण नहीं कर सकेगा।

यह आदेश 25 जून 2026 को जारी किया गया, जिसमें कहा गया है कि अनधिकृत प्रवेश से शासकीय कार्य प्रभावित होते हैं तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं शैक्षणिक वातावरण पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

सरकारी स्कूलों की निगरानी पर असर पड़ने की आशंका

सरकारी विद्यालयों की जर्जर इमारतों, शिक्षकों की अनुपस्थिति, मिड-डे मील की गुणवत्ता, मूलभूत सुविधाओं की कमी और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी अन्य समस्याओं को उजागर करने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

मीडिया जगत के कुछ प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि पत्रकारों के लिए विद्यालयों तक पहुंच पूर्व अनुमति पर निर्भर होगी, तो जनहित से जुड़े कई मुद्दों की स्वतंत्र रिपोर्टिंग प्रभावित हो सकती है।

एक वरिष्ठ पत्रकार ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर कहा,

“पत्रकार स्कूलों में पढ़ाई बाधित करने नहीं जाते, बल्कि यह देखने जाते हैं कि सरकारी दावे और जमीनी हकीकत में कितना अंतर है। कई मामलों में मीडिया रिपोर्ट के बाद ही सुधारात्मक कार्रवाई हुई है।”

सुरक्षा बनाम पारदर्शिता: बहस का नया केंद्र

प्रशासन का तर्क है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा विद्यालय परिसर में अनियंत्रित प्रवेश को नियंत्रित करना आवश्यक है।

हालांकि मीडिया और नागरिक समाज के कुछ वर्गों का मत है कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ पारदर्शिता और सार्वजनिक जवाबदेही भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनका कहना है कि वैध पहचान-पत्रधारी पत्रकारों के लिए स्पष्ट एवं व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जा सकती है।

आदेश की प्रमुख बातें

  • बिना पूर्व अनुमति पत्रकार एवं आम नागरिक विद्यालय परिसर में प्रवेश नहीं कर सकेंगे।
  • अनुमति संबंधित सक्षम अधिकारी अथवा जिला शिक्षा अधिकारी से प्राप्त करनी होगी।
  • आदेश का उद्देश्य विद्यार्थियों की सुरक्षा और शैक्षणिक वातावरण बनाए रखना बताया गया है।

कानूनी और संवैधानिक पहलू पर चर्चा

विधि विशेषज्ञों का कहना है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के अंतर्गत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आधारशिला है। वहीं सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुशासन का महत्वपूर्ण तत्व मानी जाती है।

विशेषज्ञों का मत है कि सुरक्षा और पारदर्शिता—दोनों के बीच संतुलन स्थापित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।

मीडिया संगठनों ने उठाए सवाल

कुछ मीडिया संगठनों और पत्रकार प्रतिनिधियों ने आदेश पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि यदि पत्रकारों की स्वतंत्र पहुंच अत्यधिक सीमित होगी तो सरकारी संस्थानों की निष्पक्ष निगरानी प्रभावित हो सकती है।

दूसरी ओर प्रशासनिक पक्ष का कहना है कि आदेश का उद्देश्य केवल सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है, न कि मीडिया की स्वतंत्रता को सीमित करना।

क्या बनेगी नई नीति?

अब यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या यह केवल सिंगरौली जिले तक सीमित प्रशासनिक निर्णय है या भविष्य में अन्य जिलों अथवा राज्यों में भी इसी प्रकार के निर्देश लागू किए जा सकते हैं।

यदि ऐसा होता है, तो शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, मीडिया की भूमिका और विद्यार्थियों की सुरक्षा के बीच संतुलन को लेकर व्यापक नीति-स्तर की बहस होना तय माना जा रहा है।


MP संवाद का सवाल

सरकारी विद्यालय जनता के कर से संचालित होते हैं। ऐसे में उनकी जवाबदेही भी सार्वजनिक होनी चाहिए। विद्यार्थियों की सुरक्षा सर्वोपरि है, लेकिन क्या सुरक्षा और पारदर्शिता के बीच ऐसा संतुलन बनाया जा सकता है जिससे न शिक्षा प्रभावित हो और न ही जनहित की पत्रकारिता?

नोट: यह समाचार उपलब्ध आदेश, सार्वजनिक जानकारी तथा विभिन्न पक्षों द्वारा व्यक्त विचारों पर आधारित है। संबंधित प्रशासन अथवा शिक्षा विभाग का विस्तृत पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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