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ट्रक, राइस मिल और इथेनॉल प्लांट… चावल घोटाले की पूरी चेन जांच के दायरे में.

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Truck, Rice Mill and Ethanol Plant… The Entire Chain of the Rice Scam Under Investigation.

Special Correspondent, Sudheer Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, बालाघाट। बालाघाट के सरकारी चावल हेराफेरी कांड में फरार चल रहे आरोपियों को न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। वारासिवनी के राइस मिल संचालक सौरभ संचेती और इथेनॉल प्लांट प्रतिनिधि राहुल प्रताप की जमानत याचिका अदालत ने खारिज कर दी है। इसके साथ ही दोनों आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हो गए हैं, जिससे उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

माना जा रहा है कि अदालत के इस फैसले से मामले की जांच कर रही एसआईटी को बड़ी मजबूती मिली है और अब आरोपियों की गिरफ्तारी की संभावनाएं तेज हो गई हैं।

727 क्विंटल सरकारी चावल का रहस्य अब भी बरकरार

मामला सरकार की इथेनॉल योजना के तहत एफसीआई के नवेगांव डिपो से भेजे गए सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, तीन ट्रकों में भरकर चावल छिंदवाड़ा जिले के बोरगांव स्थित इथेनॉल प्लांट भेजा गया था।

लेकिन रास्ते में बड़ा खेल सामने आया। एक ट्रक छिंदवाड़ा पहुंचने के बजाय वारासिवनी स्थित संचेती राइस मिल परिसर में खड़ा मिला। जांच के दौरान उसमें से 490 बोरियां (242.55 क्विंटल) सरकारी चावल बरामद किया गया।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि शेष दो ट्रकों में भरा करीब 485 क्विंटल सरकारी चावल आखिर कहां गया? इसका जवाब अब तक जांच एजेंसियों को नहीं मिला है।

फरार आरोपी, बढ़ते सवाल

एफआईआर दर्ज होने के बाद से सौरभ संचेती और राहुल प्रताप लगातार फरार बताए जा रहे हैं। पुलिस और एसआईटी उनकी तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है, लेकिन अब तक दोनों गिरफ्त से बाहर हैं।

जांच एजेंसियों को आशंका है कि सरकारी चावल निर्धारित गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही कहीं और खपा दिया गया। यही कारण है कि मामले को करोड़ों रुपये के संभावित खाद्यान्न घोटाले के रूप में देखा जा रहा है।

एसआईटी की रडार पर रिकॉर्ड, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और राइस मिलें

एसआईटी अब एफसीआई रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेज, ट्रकों की मूवमेंट और संबंधित राइस मिलों के रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही है।

हाल ही में एक राइस मिल से विभिन्न मिलों के बारदाने मिलने के बाद जांच का दायरा और बढ़ गया है। जांचकर्ता यह पता लगाने में जुटे हैं कि सरकारी चावल कहां उतारा गया, किसने खरीदा और इस पूरे खेल से किसे फायदा पहुंचा।

गिरफ्तारी से खुल सकते हैं कई राज

जांच अधिकारियों का मानना है कि दोनों फरार आरोपियों की गिरफ्तारी होने पर पूरे नेटवर्क और चावल हेराफेरी के पीछे काम कर रहे लोगों के बारे में कई महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

यही वजह है कि एसआईटी और पुलिस दोनों आरोपियों की तलाश में लगातार कार्रवाई कर रही हैं।

करोड़ों के चावल घोटाले पर टिकी सबकी नजर

सरकारी चावल की हेराफेरी से जुड़े इस मामले ने प्रशासनिक गलियारों से लेकर राजनीतिक हलकों तक हलचल मचा दी है। जमानत याचिका खारिज होने और गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि फरार आरोपी कब गिरफ्तार होंगे और 485 क्विंटल गायब चावल का सच आखिर कब सामने आएगा।

क्या बोले एसपी?

बालाघाट पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने अनुसार—

“चावल कांड के आरोपियों की जमानत याचिका न्यायालय ने खारिज कर दी है। एसआईटी आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। साथ ही मामले से जुड़े दस्तावेजी और अन्य साक्ष्यों को भी मजबूत किया जा रहा है।”

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