जनभागीदारी से बच सकती है कटनी की यह ऐतिहासिक विरासत.
This Historic Heritage of Katni Can Be Preserved Through Public Participation.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Katni, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, कटनी। कटनी जिले की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा आज उपेक्षा और बदहाली का शिकार बना हुआ है। बहोरीबंद तहसील के ग्राम धूरी (बंधी) में स्थित लगभग 200 वर्ष पुरानी दो मंजिला बावली मलबे, गाद और कचरे से पट चुकी है। हालांकि बावली की दीवारों पर जड़ी कलात्मक एवं प्राचीन प्रतिमाएं आज भी इसके गौरवशाली अतीत की गवाही दे रही हैं।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र सिंह ठाकुर द्वारा साझा की गई तस्वीरों में बावली की दयनीय स्थिति स्पष्ट दिखाई देती है। पत्थरों से निर्मित मजबूत संरचना, मेहराबदार प्रवेश द्वार, ऊपरी मंजिल के अवशेष तथा दीवारों पर उकेरी गई आकर्षक मूर्तिकला इस ऐतिहासिक धरोहर की स्थापत्य कला को दर्शाती है।
कभी जल स्रोत और सामाजिक केंद्र थी यह बावली
स्थानीय जानकारों के अनुसार, इस बावली का निर्माण लगभग दो शताब्दी पूर्व क्षेत्र के मालगुजार बाबू बालगोविंद दुबे द्वारा कराया गया था। उस दौर में मालगुजारों द्वारा सार्वजनिक हित के लिए कुएं, तालाब और बावड़ियों जैसी जल संरचनाओं का निर्माण कराया जाता था।
यह बावली केवल पेयजल और वर्षा जल संरक्षण का साधन नहीं थी, बल्कि ग्रामीण सामाजिक जीवन और सांस्कृतिक गतिविधियों का भी प्रमुख केंद्र हुआ करती थी।
प्रतिमाओं और स्थापत्य कला में झलकता है इतिहास
बावली की दोनों दिशाओं में जड़ी अनेक प्राचीन प्रतिमाएं इसकी कलात्मक और पुरातात्विक महत्ता को दर्शाती हैं। कुछ प्रतिमाएं खड़ी मुद्रा में हैं तो कुछ आसीन अवस्था में दिखाई देती हैं। इन पर की गई बारीक नक्काशी तत्कालीन शिल्पकला की उत्कृष्टता को उजागर करती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन प्रतिमाओं और संरचना का वैज्ञानिक संरक्षण किया जाए तो यह स्थल इतिहास और संस्कृति में रुचि रखने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण बन सकता है क्षेत्र
कटनी जिला अपनी समृद्ध ऐतिहासिक धरोहरों, प्राचीन मंदिरों, विष्णु प्रतिमाओं और जैन संस्कृति से जुड़े स्थलों के लिए जाना जाता है। बहोरीबंद क्षेत्र में स्थित जैन तीर्थंकर शांतिनाथ की विशाल प्रतिमा पहले से ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करती है।
ऐसे में धूरी (बंधी) की यह बावली भी संरक्षण और सौंदर्यीकरण के बाद जिले के पर्यटन मानचित्र पर अपनी विशेष पहचान बना सकती है।
जल गंगा संवर्धन अभियान से जागी उम्मीद
राजेंद्र सिंह ठाकुर ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से बावली के संरक्षण की मांग करते हुए लिखा है—
“ग्राम धूरी (बंधी) स्थित दो मंजिला बावली वक्त के थपेड़ों और सामाजिक-प्रशासनिक उपेक्षा के कारण मलबे एवं कचरे से पट गई है। बावली की दोनों दिशाओं में अनेक कलात्मक प्राचीन प्रतिमाएं जड़ी हुई हैं। यदि जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत इसकी समुचित साफ-सफाई और मरम्मत कराई जाए तो यह एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो सकती है।”
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य पारंपरिक जल स्रोतों जैसे बावड़ियों, कुओं, तालाबों और नदियों का संरक्षण एवं पुनर्जीवन है। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि इस अभियान के तहत बावली का जीर्णोद्धार कराया जाए तो यह जल संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का भी उत्कृष्ट उदाहरण बन सकती है।
प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से संरक्षण की अपील
स्थानीय लोगों ने कटनी जिला प्रशासन, बहोरीबंद तहसील प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और ग्राम पंचायत से इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते यदि सफाई, मरम्मत और संरक्षण कार्य नहीं किए गए तो यह बहुमूल्य विरासत धीरे-धीरे पूरी तरह नष्ट हो सकती है।
कटनी की इस ऐतिहासिक बावली को नई पहचान देने और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखने की दिशा में अब ठोस पहल की जरूरत महसूस की जा रही है।