भोपाल पुलिस में ‘पास-फेल’ सिस्टम लागू, थानेदारों की परफॉर्मेंस पर टिकी कुर्सी.
Bhopal Police Introduces ‘Pass-Fail’ System: Station House Officers’ Positions Now Depend on Performance.

Special Correspondent, Harishankar Parashar Bhopal, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, भोपाल। भोपाल पुलिस कमिश्नरेट में थाना प्रभारियों की कार्यप्रणाली को अधिक जवाबदेह और परिणाम आधारित बनाने के लिए एक नई व्यवस्था लागू की जा रही है। अब थाना प्रभारियों की कार्यकुशलता केवल अपराध दर्ज करने या शिकायतों के निपटारे तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें हर महीने 1000 अंकों की ग्रेडिंग प्रणाली से गुजरना होगा।
पुलिस कमिश्नर संजय कुमार की पहल पर तैयार इस मॉडल में लगातार खराब प्रदर्शन करने वाले थाना प्रभारियों को पद से हटाया भी जा सकता है।
22 पैमानों पर होगी थानेदारी की परीक्षा
नई ग्रेडिंग प्रणाली में थाना प्रभारियों का मूल्यांकन 22 प्रमुख पुलिसिंग बिंदुओं के आधार पर किया जाएगा। इनमें आर्म्स एक्ट और एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई, गिरफ्तारी वारंटों की तामिली, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी, निगरानीशुदा बदमाशों पर कार्रवाई, जिलाबदर अपराधियों की निगरानी, प्रतिबंधात्मक कार्रवाई और गंभीर अपराधों की विवेचना जैसे विषय शामिल हैं।
हर बिंदु के लिए अलग-अलग अंक निर्धारित किए गए हैं और महीने के अंत में थाना प्रभारी का कुल स्कोर तैयार किया जाएगा।
सिर्फ अंक नहीं, माइनस मार्किंग भी
इस व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता यह है कि केवल अच्छे कार्यों पर अंक नहीं मिलेंगे, बल्कि लापरवाही पर अंक काटे भी जाएंगे।
यदि किसी थाने में गंभीर अपराध बढ़ते हैं, फरार आरोपी लंबे समय तक पकड़ से बाहर रहते हैं, जिलाबदर अपराधियों की निगरानी में कमी पाई जाती है या लंबित वारंटों की संख्या बढ़ती है, तो संबंधित थाना प्रभारी के अंक कम किए जाएंगे।
दूसरे थाने ने आरोपी पकड़ा तो मिलेगा बोनस
ग्रेडिंग सिस्टम में एक दिलचस्प प्रावधान भी शामिल किया गया है। यदि किसी थाने का फरार आरोपी दूसरे थाना क्षेत्र की पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जाता है, तो आरोपी पकड़ने वाले थाने को बोनस अंक मिलेंगे, जबकि संबंधित थाना प्रभारी के अंक घटाए जाएंगे।
इसका उद्देश्य पुलिस अधिकारियों के बीच जवाबदेही और प्रतिस्पर्धी कार्यसंस्कृति विकसित करना बताया जा रहा है।
अच्छे काम पर अतिरिक्त अंक
गंभीर अपराधों में आरोपियों की जमानत का प्रभावी विरोध करने, फरार अपराधियों की गिरफ्तारी करने और विशेष अभियानों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले थाना प्रभारियों को अतिरिक्त अंक दिए जाएंगे।
तीन बार फेल हुए तो जा सकती है कुर्सी
सूत्रों के अनुसार, यदि कोई थाना प्रभारी लगातार तीन माह तक निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरता, तो उसके खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है। इसमें थाना प्रभार बदलना या अन्य जिम्मेदारी देना भी शामिल हो सकता है।
कमिश्नरेट में हुई प्रस्तुति
हाल ही में पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने सभी थाना प्रभारियों की बैठक लेकर नई ग्रेडिंग प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। प्रस्तुति के माध्यम से मूल्यांकन प्रक्रिया, अंक प्रणाली और माइनस मार्किंग के नियम समझाए गए।
बताया जा रहा है कि इस व्यवस्था का ट्रायल इसी माह से शुरू किया जा सकता है।
बड़ा सवाल
पुलिसिंग में जवाबदेही बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की जा रही यह व्यवस्था कितनी प्रभावी साबित होगी, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा। हालांकि इतना तय है कि अब भोपाल में थानेदारों की कुर्सी केवल वरिष्ठता से नहीं, बल्कि प्रदर्शन से भी तय होती नजर आएगी।