आदेश कागजों में, आरोपी मैदान में! गेहूं खरीदी में बड़ा खेल?
Orders on Paper, Accused Still in Action! Big Game in Wheat Procurement?

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, कटनी।
कटनी जिले में गेहूं खरीदी से जुड़े कथित बारदाना घोटाले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हैरानी की बात यह है कि SDM के स्पष्ट आदेश के बावजूद अब तक FIR दर्ज नहीं हुई, जिससे पूरे मामले में संरक्षण और मिलीभगत की आशंका गहराती जा रही है।
SDM का आदेश कागजों में दफन?
मामला खरीदी केंद्र कांटी का है, जहां केंद्र प्रभारी अनमोल दुबे पर शासकीय बारदाने को निजी गोदाम में रखकर गबन करने का आरोप है।
जांच में दोषी पाए जाने के बाद 16 अप्रैल को SDM ने आदेश जारी किया था कि आरोपी को तत्काल पद से हटाकर FIR दर्ज की जाए।
लेकिन आदेश के 15 दिन बाद भी न तो FIR दर्ज हुई और न ही आरोपी को हटाया गया—जिससे प्रशासन की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं।
“संरक्षण” के आरोप, DSO पर उठे सवाल
सोमवार को राष्ट्रीय भ्रष्टाचार निरोधक टाईगर्स संस्थान ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) पर आरोपी को बचाने और मामले को दबाने के आरोप लगाए।
संस्थान के पदाधिकारी कमल कुमार शर्मा का कहना है कि DSO ने SDM के आदेश को नजरअंदाज कर दिया, जिससे साफ संकेत मिलते हैं कि मामले को जानबूझकर दबाया जा रहा है।
15 दिन बाद भी पद पर आरोपी, प्रशासन मौन क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब जांच में दोष सिद्ध हो चुका है, तो आरोपी अब भी पद पर कैसे बना हुआ है?
क्या प्रशासनिक सिस्टम में “अंदरखाने सेटिंग” हावी है, या फिर जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई से बच रहे हैं?
3 दिन का अल्टीमेटम, घेराव और लोकायुक्त की चेतावनी
संस्था ने प्रशासन को 3 दिन का अल्टीमेटम दिया है।
चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय में कार्रवाई नहीं हुई, तो कलेक्ट्रेट का घेराव किया जाएगा और मामले की शिकायत लोकायुक्त में दर्ज कराई जाएगी।
सरकार ने बढ़ाई खरीदी सुविधा, जमीनी हकीकत पर सवाल
एक ओर राज्य सरकार किसानों की सुविधा के लिए गेहूं खरीदी प्रक्रिया को मजबूत करने के दावे कर रही है—
- तौल पर्ची का समय शाम 6 बजे से बढ़ाकर रात 10 बजे तक
- भुगतान (देयक) जारी करने का समय रात 12 बजे तक
- उपार्जन अवधि 9 मई से बढ़ाकर 23 मई तक
- तौल कांटों की संख्या 4 से बढ़ाकर 6
- NIC सर्वर क्षमता में वृद्धि और मॉनिटरिंग व्यवस्था
लेकिन दूसरी ओर जमीनी स्तर पर घोटाले के आरोप इन दावों की सच्चाई पर सवाल खड़े कर रहे हैं।
बड़ा सवाल:
जब SDM के आदेश ही लागू नहीं हो रहे, तो आम किसान और जनता न्याय की उम्मीद किससे करें?
क्या सिस्टम में जवाबदेही खत्म हो चुकी है?