जनपद पंचायत में गड़बड़ी या घोटाला? दिव्यांग की राशि पर उठे सवाल.
Irregularity or Scam in Janpad Panchayat? Questions Raised Over Disabled Person’s Financial Aid.

Special Correspondent, Katni, MP Samwad News.
MP संवाद समाचार, कटनी।
कटनी जिले के विजयराघवगढ़ जनपद पंचायत से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां विकलांगता सहायता राशि में कथित गड़बड़ी ने सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
“अपात्र” बताकर रोका, लेकिन राशि किसी और को दे दी!
ग्राम पंचायत झिरिया के ग्राम सलैया बड़गैयां निवासी भोला भूमिया ने आरोप लगाया है कि उनकी स्वीकृत 2 लाख रुपये की सहायता राशि किसी अन्य व्यक्ति के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी गई।
भोला भूमिया (पिता–सम्मन भूमिया) के अनुसार, उन्होंने 24 सितंबर 2022 को लोक सेवा केंद्र विजयराघवगढ़ में मध्यप्रदेश भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल की योजना के तहत आवेदन किया था, जिसका पंजीयन क्रमांक RS/450/1601/2/2022 है।
जनपद ने बताया “अपात्र”, बाद में खुला खेल!
पीड़ित का कहना है कि समय-सीमा पूरी होने के बाद जब उन्होंने जनपद कार्यालय में जानकारी ली, तो उन्हें “अपात्र” बताकर आवेदन निरस्त होने की बात कही गई।
लेकिन बाद में मिली जानकारी ने पूरा मामला पलट दिया—भोला भूमिया योजना के लिए पात्र पाए गए थे और उनके नाम से राशि स्वीकृत भी हो चुकी थी।
“अपने” के खाते में पैसा? लिपिक पर सीधा आरोप
भोला भूमिया ने आरोप लगाया है कि जनपद पंचायत के शाखा लिपिक फूलचंद्र पयासी ने उनकी स्वीकृत राशि को कथित रूप से अपने परिचित भीखम ढीमर के बैंक खाते में ट्रांसफर करवा दिया।
हैरानी की बात यह है कि आवेदन के साथ पीड़ित ने अपने दो बैंक खातों की जानकारी स्पष्ट रूप से दी थी, इसके बावजूद राशि दूसरे खाते में पहुंच गई।
शिकायत पर भी नहीं हुई सुनवाई, गुमराह करने का आरोप
पीड़ित का कहना है कि जब उन्होंने इस मामले की शिकायत की, तो उन्हें लगातार गुमराह किया गया और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को सुनियोजित भ्रष्टाचार बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग
भोला भूमिया ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में जांच दल गठित कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और उन्हें उनकी स्वीकृत सहायता राशि दिलाई जाए।
बड़ा सवाल:
क्या जनपद पंचायतों में गरीब और दिव्यांगों के हक की राशि भी सुरक्षित नहीं है?
या फिर सिस्टम के भीतर ही “सेटिंग” का खेल चल रहा है?