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शिक्षा विभाग में करोड़ों का घोटाला: लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई!

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Multi-crore scam in the Education Department: Lokayukta takes major action!

Special Correspondent, Amit Singh, Rewa, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, सिंगरौली। सिंगरौली जिले के शिक्षा विभाग में करोड़ों रुपए की कथित अनियमितताओं का बड़ा मामला सामने आने के बाद अब लोकायुक्त रीवा ने जांच तेज कर दी है। जिला शिक्षा अधिकारी समेत कई अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज होते ही विभाग में हड़कंप मच गया है।

शिकायत से खुला “खरीद घोटाले” का खेल

जानकारी के अनुसार, एक शिकायतकर्ता ने लोकायुक्त कार्यालय रीवा में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सिंगरौली में नियमों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर खरीद की गई और पद का दुरुपयोग करते हुए वित्तीय अनियमितताएं की गईं।

आंकड़ों में बड़ा खेल: करोड़ों की खरीद पर सवाल

प्रारंभिक जांच में सामने आए आंकड़े चौंकाने वाले हैं—

  • 558 स्कूलों के लिए स्वच्छता व कीटाणुनाशक सामग्री पर ₹97.67 लाख खर्च
  • 19 स्कूलों के लिए वर्चुअल रियलिटी लैब पर ₹4.68 करोड़ खर्च
  • 61 स्कूलों में बिजली व मरम्मत कार्य पर ₹3.05 करोड़ खर्च

इन सभी खरीद प्रक्रियाओं में निविदा, स्वीकृति और भुगतान प्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं।

कई अधिकारी घेरे में, केस दर्ज

लोकायुक्त रीवा ने जिला शिक्षा अधिकारी सूर्यभान सिंह, सहायक संचालक शिक्षा राजधर साकेत, जिला परियोजना समन्वयक रामलखन शुक्ल, सहायक परियोजना समन्वयक (वित्त) छविलाल सिंह सहित अन्य अधिकारियों के खिलाफ अपराध क्रमांक 43/2026 दर्ज किया है। मामला भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 और भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं के तहत दर्ज हुआ है।

दफ्तर में छापा, दस्तावेज जब्त

15 अप्रैल 2026 को लोकायुक्त रीवा की टीम जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय सिंगरौली पहुंची और टेंडर, बिल, भुगतान व सप्लाई से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए। अब इन्हीं के आधार पर पूरे वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है।

लोकायुक्त का बयान: “दोषियों पर होगी सख्त कार्रवाई”

लोकायुक्त रीवा के टीआई संदीप भदौरिया ने बताया कि शिकायत के बाद जांच में प्रारंभिक रूप से गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इसी आधार पर प्रकरण दर्ज कर गहन जांच शुरू कर दी गई है।

“बच्चों की पढ़ाई या भ्रष्टाचार की कमाई?”

शिक्षा जैसे संवेदनशील विभाग में करोड़ों के इस कथित घोटाले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि जांच में कितनी सच्चाई सामने आती है और क्या दोषियों पर सख्त कार्रवाई होती है।

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