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नोटशीट ने खोली पोल: अफसरों की चुप्पी पर उठे सवाल.

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Note sheet exposes the truth: Questions raised over officials’ silence.

Special Correspondent, Harishankar Parashar, Bhopal, MP Samwad News.

MP संवाद, भोपाल। मध्य प्रदेश का बहुचर्चित पोषण आहार घोटाला अब सिर्फ आर्थिक अनियमितता नहीं, बल्कि सिस्टम पर बड़ा सवाल बन चुका है। सवाल सीधा है—क्या करोड़ों के इस घोटाले में बड़े अफसरों को बचाया जा रहा है?

पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल की गोपनीय नोटशीट ने इस बहस को और तेज कर दिया है। नोटशीट में साफ संकेत है कि कुछ अधिकारी जानबूझकर दस्तावेज रोककर जांच को कमजोर कर रहे हैं। इससे शक और गहरा गया है कि कहीं पूर्व मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैंस को बचाने की कोशिश तो नहीं हो रही।

2018 से 2022 के बीच हुए इस कथित घोटाले में कागजों पर फर्जी उत्पादन, फर्जी सप्लाई और फर्जी लाभार्थियों के नाम पर करोड़ों रुपये डकार लिए गए। CAG की रिपोर्ट ने भी इस खेल की परतें खोल दी थीं—जहां ट्रकों की जगह मोटरसाइकिल से सप्लाई दिखाकर सरकारी खजाने को चूना लगाया गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह घोटाला सीधे बच्चों और महिलाओं के पोषण से जुड़ा है। यानी जिनके लिए राशन था, उन्हें कुपोषण मिला और सिस्टम में बैठे लोगों ने मुनाफा।

पारस सकलेचा की शिकायत पर दर्ज इस मामले में 200 से ज्यादा अधिकारी जांच के दायरे में हैं, लेकिन एक साल बाद भी जांच कागजों के अभाव में ठप पड़ी है।

विपक्ष की भूमिका में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस लगातार CBI जांच की मांग कर रही है, जबकि सरकार कार्रवाई का दावा कर रही है। लेकिन असली सवाल अब भी कायम है—
क्या दोषियों तक जांच पहुंचेगी या फाइलों में ही दफन हो जाएगी?

मंत्री की नोटशीट के बाद उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन अब जनता जवाब चाहती है—
बच्चों के हक का हिसाब कौन देगा?

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