cropped-mp-samwad-1.png

मरीजों पर प्रयोग? गुना में ट्रायल रन ने खोल दी अस्पताल प्रबंधन की पोल.

0

Are patients being used as test subjects? Trial run in Guna exposes hospital management’s failures.

Special Correspondent, Richa Tiwari, Guna, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, गुना। जिला अस्पताल गुना प्रबंधन की अदूरदर्शी योजना और विभागीय तालमेल की भारी कमी ने एक बार फिर जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। मरीजों की सुविधा के नाम पर खोला गया नवनिर्मित क्रिटिकल केयर ब्लॉक महज तीन दिन में ही बंद कर दिया गया, जबकि इसे 10 दिनों के ट्रायल रन के लिए शुरू किया गया था।

अचानक ताले लगने से न केवल मरीजों को इलाज के लिए भटकना पड़ा, बल्कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर भी असहाय नजर आए।

ट्रायल के दौरान पुरानी बिल्डिंग से ओपीडी और इमरजेंसी सेवाओं को नए क्रिटिकल केयर ब्लॉक में शिफ्ट किया गया था। निर्देश के बाद डॉक्टरों ने वहां अपनी सेवाएं शुरू कीं और आधुनिक मशीनें व जरूरी उपकरण भी नई इमारत में पहुंचा दिए गए।

लेकिन तीसरे ही दिन बिना किसी स्पष्ट सूचना के पूरी बिल्डिंग बंद कर दी गई। नतीजा यह हुआ कि डॉक्टरों का महंगा और जरूरी उपकरण अंदर ही बंद रह गया और मरीज इलाज के लिए अस्पताल परिसर में इधर-उधर भटकते रहे।

मोबाइल की टॉर्च से जांच, मशीनें ताले में कैद

अव्यवस्था की तस्वीर तब और गंभीर हो गई, जब विशेषज्ञ डॉक्टरों को बिना उपकरणों के मरीज देखना पड़ा।
कान, नाक व गला रोग विशेषज्ञ को मरीजों की जांच मोबाइल की टॉर्च से करनी पड़ी, जबकि नेत्र विशेषज्ञ बिना मशीनों के केवल अनुभव के भरोसे परामर्श देते नजर आए।

मशीनों के अभाव में न तो सही जांच हो सकी और न ही सटीक इलाज संभव हो पाया। दूर-दराज से आए मरीजों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ी।

बिना जवाब बंद कर दिया गया पूरा ब्लॉक

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब ट्रायल रन पहले से तय था, तो बीच में ही आनन-फानन में पूरी बिल्डिंग बंद करने का फैसला क्यों लिया गया?
अस्पताल प्रबंधन के इस फैसले से मरीजों और डॉक्टरों दोनों के बीच भारी असमंजस की स्थिति बनी रही और इलाज केवल औपचारिकता बनकर रह गया।

सीएमएचओ का बयान, जिम्मेदारी से पल्ला?

इस मामले पर सीएमएचओ डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर ने नाराजगी जताते हुए कहा कि नई बिल्डिंग में फायर सेफ्टी समेत कुछ तकनीकी परीक्षण अभी बाकी हैं।
ट्रायल के उद्देश्य से ओपीडी को अस्थायी रूप से शिफ्ट किया गया था और स्टाफ को केवल आवश्यक सामान रखने के निर्देश दिए गए थे।

उन्होंने दावा किया कि शाम को ग्रुप मैसेज के माध्यम से भी सामान हटाने की सूचना दी गई थी, लेकिन संबंधित स्टाफ की लापरवाही के कारण यह स्थिति बनी।
सीएमएचओ ने स्पष्ट किया कि जिम्मेदार कर्मचारियों को नोटिस जारी किए जाएंगे और सभी तकनीकी परीक्षण पूरे होने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।

मरीजों पर प्रयोग क्यों?

फिलहाल जिला अस्पताल की यह अव्यवस्था मरीजों को राहत देने के बजाय और अधिक दुविधा में डाल रही है।
क्रिटिकल केयर ब्लॉक जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट का ट्रायल यदि इसी तरह अव्यवस्थित और गैर-जिम्मेदाराना ढंग से किया जाएगा, तो सवाल यही उठता है—

क्या सिस्टम में सुधार होगा या मरीजों को ऐसे ही अधूरे प्रयोगों का शिकार बनाया जाता रहेगा?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed

In respect of all matters arising under and in relation to this Company or the Arrangement and waives, the exclusive jurisdiction of the courts of the Bhopal and the laws of Madhya Pradesh and India, to the fullest extent possible, shall be applicable. | CoverNews by AF themes.