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नर्मदा पर आदेशों की अनदेखी! NGT ने प्रशासन को कठघरे में खड़ा किया.

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NGT orders removal of illegal dairies and encroachments on Narmada river flood zone in Jabalpur Madhya Pradesh

नर्मदा किनारे अवैध डेयरियों और अतिक्रमण पर सख्त एनजीटी आदेश

Ignoring Orders on the Narmada! NGT puts the administration in the dock.

Special Correspondent, Anand Tamrakar, Balaghat, MP Samwad News.

MP संवाद समाचार, जबलपुर। नर्मदा नदी के संरक्षण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के सख्त निर्देशों के बावजूद जिला प्रशासन और संबंधित विभागों की लापरवाही एक बार फिर उजागर हो गई है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल, सेंट्रल जोन के न्यायमूर्ति शेवकुमार सिंह एवं विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी ने नर्मदा के बाढ़ क्षेत्र में फैले अतिक्रमण, अवैध निर्माण और नदी किनारे संचालित डेयरियों को लेकर पूर्व में जारी आदेशों को दोहराते हुए तीन माह में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

एनजीटी ने स्पष्ट किया है कि नर्मदा के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन पिछले 25 वर्षों के आंकड़ों के आधार पर किया जाए तथा इस क्षेत्र में मौजूद स्थायी निर्माणों को तत्काल हटाया जाए। साथ ही बाढ़ क्षेत्र में किसी भी प्रकार के नए स्थायी निर्माण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के आदेश दिए गए हैं।

ट्रिब्यूनल ने OA  क्रमांक 139 में पारित आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश देते हुए कहा है कि नर्मदा, परियट एवं गौर नदी के किनारे स्थापित डेयरियों को हटाकर अन्य स्थानों पर पुनर्वासित किया जाए, ताकि डेयरियों से निकलने वाला अपशिष्ट और गंदगी सीधे नदी में न पहुंचे।

यह आदेश डॉ. पी.जी. नाजपांडे द्वारा दायर याचिका पर 28 जनवरी को पारित किया गया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रतीक जैन ने अधिकरण को बताया कि पिछले तीन वर्षों से न तो नर्मदा के बाढ़ क्षेत्र का सीमांकन किया गया और न ही वहां से अतिक्रमण हटाए गए। इसके अलावा, डेयरियों को हटाने संबंधी पूर्व आदेशों की भी खुलेआम अवहेलना की जा रही है, जिससे नर्मदा में लगातार गंदगी प्रवाहित हो रही है।

एनजीटी ने अपने आदेश में यह भी निर्देशित किया है कि नदी से 100 मीटर के दायरे में प्लास्टिक के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया जाए।

डेयरियों को हटाने की पूरी जिम्मेदारी कलेक्टर को सौंपते हुए अधिकरण ने पूर्व रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें परियट नदी के किनारे 40, गौर नदी के किनारे 12 तथा नर्मदा नदी के किनारे 25 डेयरियों के संचालन की पुष्टि की गई थी।

बड़ा सवाल – 

जबलपुर में 4 एसटीपी बंद, फिर कौन कर रहा है नर्मदा को साफ?

एनजीटी के आदेश में मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट का भी उल्लेख किया गया है, जिसके अनुसार जबलपुर शहर में स्थापित 16 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में से केवल 12 ही संचालित हैं, जबकि 4 एसटीपी पूरी तरह बंद पाए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार ललपुर, उमाघाट (ग्वारीघाट), रानीताल तालाब तथा गुलौआ तालाब के एसटीपी बंद हैं। इसके बावजूद शहर का गंदा पानी लगातार जल स्रोतों में प्रवाहित हो रहा है।

आदेश तो बार-बार, अमल कब?

एनजीटी के लगातार आदेशों के बावजूद बाढ़ क्षेत्र से अतिक्रमण हटाना, डेयरियों को स्थानांतरित करना और सीवेज शोधन व्यवस्था को दुरुस्त करना अब तक कागजों तक ही सीमित है। तीन माह में रिपोर्ट देने का नया आदेश प्रशासन के लिए एक और अग्निपरीक्षा बन गया है।

अब देखना यह है कि इस बार नर्मदा के नाम पर सिर्फ फाइलें दौड़ेंगी या वास्तव में जमीन पर कार्रवाई भी दिखाई देगी।

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