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ना डॉक्टर, ना दवा, ना बिजली – रीठी अस्पताल की बर्बादी की तस्वीर.

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Neglected Reethi Hospital in Katni with no doctors and electricity, patients suffering in dark ICU – mpsamwad.com report

No Doctor, No Medicine, No Electricity – A Picture of Ruin at Reethi Hospital.

Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.

Reethi Community Health Centre in Katni is plagued by extreme negligence – no doctors, no medicines, no electricity. Patients suffer in dark, hot wards despite available generators. Management remains unaccountable, and officials turn a blind eye. The public demands action, but health authorities continue to ignore the hospital’s crumbling state.

MP संवाद, कटनी। रीठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एक बार फिर लापरवाहियों और बदइंतज़ामी के कारण सुर्खियों में है। हैरानी की बात यह है कि मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) भी इस गंभीर स्थिति की ओर ध्यान नहीं दे रहे।


न साफ-सफाई, न इलाज का सिस्टम

अस्पताल में न सफाई व्यवस्था है, न मरीजों की भर्ती का सही इंतज़ाम। डॉक्टरों द्वारा लिखी गई दवाएं भी मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं। कई मरीज सुबह से लाइन में लगने के बावजूद इलाज के लिए डॉक्टर का इंतज़ार करते रहे।


सुबह 11 बजे तक डॉक्टर गायब!

सबसे शर्मनाक स्थिति तब दिखी जब इलाज के लिए आए मरीजों को सुबह 11 बजे तक कोई डॉक्टर नहीं मिला। प्रबंधन की लापरवाही के कारण मरीज अस्पताल में भटकते रहे और दर्द से कराहते रहे।


ICU में न बिजली, न राहत – जनरेटर होने के बावजूद अंधेरा

ICU वार्ड में भर्ती मरीज अंधेरे और गर्मी से बेहाल रहे। जनरेटर और इनवर्टर अस्पताल परिसर में मौजूद होने के बावजूद चालू नहीं किया गया। परेशान परिजन अपने मरीजों को तौलिए से हवा देते दिखे।


जनरेटर चालू क्यों नहीं हुआ? जवाबदेही कौन लेगा?

अगर अस्पताल में सुविधा उपलब्ध है तो उसका उपयोग क्यों नहीं हो रहा?

  • अगर जनरेटर खराब है, तो अब तक सुधारा क्यों नहीं गया?
  • क्या विभाग के पास मरम्मत के पैसे नहीं हैं?
  • क्या हर बार सिर्फ बिल पास कराकर जेबें भरना ही मकसद है?

CMHO का पुराना वादा: “व्यवस्था सुधरेगी” – लेकिन कब?

हर बार की तरह CMHO डॉ. राज सिंह ने जवाब दिया कि “व्यवस्था सुधारी जाएगी।” लेकिन यह बयान अब सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गया है। जनता जवाब चाहती है — स्वास्थ्य विभाग की नज़र कब पड़ेगी ज़मीनी हकीकत पर?

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