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बुनियादी सुविधाओं की पोल खुली! कटनी में गर्भवती को झोली में उतारना पड़ा पहाड़.

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Villagers carrying pregnant woman in sling down hill in Katni due to no road before delivery

Basic Facilities Exposed! Pregnant Woman in Katni Carried Down the Hill in a Sling.

Mohan Nayak, Special Correspondent, Katni, MP Samwad.

In Katni’s tribal-dominated Dhimarkheda block, lack of a proper road forced villagers to carry a pregnant woman in a sling down a hill. She delivered her baby on the way before reaching the hospital. Locals demand immediate road construction to prevent such life-threatening situations in the future.

MP संवाद, कटनी — प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद आदिवासी बहुल क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का हाल जस का तस है। बीते रविवार को ढीमरखेड़ा विकासखंड के गौरी गांव में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की बदहाली ने एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही को उजागर कर दिया। यहां सड़क न होने के कारण जननी वाहन गर्भवती महिला के घर तक नहीं पहुंच सका और महिला को रास्ते में ही बच्ची को जन्म देना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, ढीमरखेड़ा तहसील के गौरा ग्राम पंचायत के आश्रित गांव गौरी निवासी मुन्ना गौंड की पत्नी कुसुम बाई (30) को रविवार सुबह प्रसव पीड़ा हुई। परिजनों ने तुरंत जननी वाहन सेवा को सूचना दी, लेकिन दलदल और दुर्गम रास्ते के कारण वाहन गौरा गांव से आगे नहीं बढ़ सका और गौरी गांव की पहाड़ी से करीब दो किलोमीटर पहले ही रुक गया।

गांव तक पक्की सड़क न होने से परिजनों ने गर्भवती महिला को ‘झोली’ में उठाकर पहाड़ से नीचे उतारना शुरू किया। इस दौरान रास्ते में ही महिला का प्रसव हो गया। बाद में गांव की आशा कार्यकर्ता शशिप्रभा विश्वकर्मा और समाजसेवी दुर्गेश विश्वकर्मा ने मोटरसाइकिल से जच्चा और बच्ची को जननी वाहन तक पहुंचाया। वहां से दोनों को सिलौंड़ी अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।

ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार सड़क निर्माण की मांग कर चुके हैं, लेकिन समस्या अब भी जस की तस बनी हुई है। बारिश के दिनों में गौरा से गौरी तक का सफर बेहद कठिन हो जाता है और गर्भवती महिलाओं को आज भी पुराने जमाने की तरह ‘झोली’ में उठाकर पहाड़ी से नीचे लाना पड़ता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द गांव तक पक्की सड़क बनाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी जानलेवा स्थिति दोबारा न बने। ढीमरखेड़ा तहसील के दर्जनों गांव अब भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा से वंचित हैं।

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