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पोषण की पोल खुली! गंभीर रूप से कुपोषित हैं 1.36% बच्चे, योजनाएं सिर्फ कागजों में.

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Severely malnourished children in Madhya Pradesh amid government nutrition scheme failure, revealed in 2025 Assembly report

Nutrition Exposed! 1.36% Children Severely Malnourished, Schemes Exist Only on Paper.

Despite tall claims, malnutrition remains a grim reality in Madhya Pradesh. 1.36% children are severely malnourished, while 40% are stunted. Assembly discussions reveal that key nutrition schemes are failing on the ground. Opposition alleges government support of ₹8 per child is insufficient and mere paperwork dominates implementation.

MP संवाद, भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में सोमवार को कुपोषण का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने सरकार को घेरते हुए पूछा कि क्या सिर्फ 8 रुपये प्रतिदिन की राशि कुपोषित बच्चे के लिए पर्याप्त है? उन्होंने यह भी पूछा कि आदिवासी विकास खंडों में वर्ष 2020 से 2025 के बीच कितने बच्चों को एनआरसी (NRC) में भर्ती किया गया और इस योजना पर कितना खर्च हुआ।

इसके जवाब में महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बताया कि सरकार प्रति कुपोषित बच्चे के इलाज के लिए 980 रुपये देती है। उन्होंने कहा कि विभाग लगातार माताओं और बहनों को कुपोषण के प्रति जागरूक कर रहा है और बच्चों के लिए नई योजनाएं चलाई जा रही हैं। कुछ जिलों जैसे मंडला, देवास और झाबुआ में इसके अच्छे परिणाम भी मिले हैं।

हालांकि, विपक्ष इससे संतुष्ट नहीं दिखा। सदन में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार,

  • राज्य में 6 साल से कम उम्र के बच्चों में 40% बच्चे बौने हैं,
  • 27% बच्चे कम वजन वाले हैं और
  • 1.36% बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित हैं।

श्योपुर, सतना और मंडला जैसे आदिवासी बाहुल्य जिले सबसे अधिक प्रभावित हैं, हालांकि राज्य सरकार “पोषण पखवाड़ा”, “पोषण ट्रैकर” और “सोया आधारित आहार योजना” जैसी योजनाएं चला रही है।

विक्रांत भूरिया ने सवाल उठाया कि 8 रुपये या 12 रुपये प्रतिदिन में किसी अति कुपोषित बच्चे का इलाज कैसे संभव है?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार:

  • 2020-21: 11,566 बच्चों का इलाज
  • 2021-22: 12,527
  • 2022-23: 16,522
  • 2023-24: 18,046
  • 2024-25: 20,741
  • 2024-25 (केवल जून तक): 5,928

इस मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया और कहा, “सरकार आदिवासियों को सिर्फ लॉलीपॉप दिखा रही है। वर्षों से लोग पट्टों की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ ठगा गया है।”

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