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हमारे पास डॉक्टरों की कमी है. भारत में प्रति 1000 जनसंख्या पर एक डॉक्टर है, विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना सबसे जरूरी – नीति आयोग के सदस्य विनोद के. पॉल.

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We have a shortage of doctors. In India, there is one doctor per 1000 population, and it is crucial to increase the number of specialist doctors – says NITI Aayog member Vinod K. Paul.

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Manish Trivedi – Sahara Samachaar

नई दिल्ली: नीति आयोग के सदस्य विनोद के. पॉल ने दिल्ली स्थित राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (आरएमएलआईएमएस) के स्थापना दिवस समारोह को बीते गुरुवार (30 नवंबर) को संबोधित करते हुए कहा कि लोगों की पर्याप्त स्वास्थ्य देखभाल के लिए देश में एमबीबीएस और विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाना सबसे जरूरी है.

पॉल ने कहा, ‘हमारे पास डॉक्टरों की कमी है. भारत में प्रति 1000 जनसंख्या पर एक डॉक्टर है, अगर हम आयुष चिकित्सकों को जोड़ दें तो 1.3 डॉक्टर हैं, जबकि विकसित देशों में समान जनसंख्या के लिए तीन डॉक्टर हैं.’ ‘विशेषज्ञों की आवश्यकता और भी अधिक है.’ देश में विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने के लिए डीएनबी (डिप्लोमैट ऑफ नेशनल बोर्ड) पाठ्यक्रम और जिला रेजीडेंसी कार्यक्रम (डीआरपी) का उपयोग किया जाना चाहिए. डीआरपी के तहत एक-चौथाई उम्मीदवारों को बेहतर शिक्षा और मरीजों की सेवा के लिए जिला अस्पतालों में तैनात किया जाता है.

उत्तर प्रदेश में डीआरपी इस साल की शुरुआत में शुरू की गई है और सभी मेडिकल कॉलेजों के 768 उम्मीदवारों को तीन महीने की अवधि के लिए जिला अस्पतालों में तैनात किया गया है.

एमबीबीएस छात्रों को पीजी पाठ्यक्रमों में सीट पाने के बारे में चिंता नहीं करनी चाहिए, क्योंकि पीजी सीटों की संख्या बढ़ गई है और अधिक सीटें जोड़ने पर काम चल रहा है.

अगर डीपीआर ठीक से लागू किया गया तो प्रत्येक जिला अस्पताल में 5 से 10 पीजी छात्र होंगे.’

‘देश में 68,000 से अधिक पीजी मेडिकल सीटें हैं और अगर एक-चौथाई अस्पतालों में हैं तो इससे मरीजों की सेवा में सुधार करने में मदद मिलेगी और उम्मीदवारों की संख्या भी बढ़ेगी, क्योंकि कॉलेज अतिरिक्त छात्रों को ले सकते हैं.’

‘देश में पीजी सीटें 32,000 से बढ़कर 63,000 से अधिक हो गई हैं और यूजी मेडिकल सीटें 52,000 से बढ़कर 1.8 लाख हो गई हैं. चुनौती देश में विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने की है.’

कार्यक्रम में शामिल भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक और भारत सरकार के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव डॉ. राजीव बहल ने कहा, ‘अनुसंधान केवल कुछ संस्थानों तक सीमित नहीं होना चाहिए. सभी संस्थानों को इसमें भाग लेना चाहिए.’

डॉ. बहल ने कहा, ‘इस साल आईसीएमआर ने 203 विभिन्न संस्थानों को 600 अनुदान दिए और उनमें से कई को राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के रूप में नहीं जाना जाता था.’

समारोह में प्रमुख सचिव, चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य, पार्थ सारथी सेन शर्मा और आरएमएलआईएमएस निदेशक प्रोफेसर सोनिया नित्यानंद भी उपस्थित थे.

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