क्या यही है नई शिक्षा नीति? विदिशा में 701 स्कूल भवन जर्जर.
Is Vidisha’s education system failing? 701 school buildings in ruins, children forced to study under unsafe conditions. Read more about the crisis!
Vidisha's crumbling schools: 701 buildings in ruins, affecting children's education and safety.
Is this the new education policy? 701 school buildings in Vidisha are in ruins.
मध्य प्रदेश के विदिशा जिले में शिक्षा व्यवस्था की दयनीय स्थिति सामने आई है, जिसने बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर चिंताएं खड़ी कर दी हैं। जिस शिक्षा प्रणाली पर हर साल अरबों रुपये खर्च किए जाते हैं, वही व्यवस्था अब जर्जर स्कूल भवनों और बदहाल सुविधाओं के कारण दम तोड़ती नजर आ रही है।
701 स्कूल भवन पूरी तरह से जर्जर हो चुके हैं, जबकि 60 से अधिक स्कूल ढह चुके हैं। यह सिर्फ एक दावा नहीं, बल्कि स्वयं शिक्षा विभाग के आंकड़े हैं। जिले की सिरोंज और लटेरी तहसील में हालात सबसे ज्यादा खराब हैं, जहां सैकड़ों स्कूल भवनों का अभाव है। वर्षों से इन क्षेत्रों में बच्चे या तो खुले आसमान के नीचे पढ़ाई कर रहे हैं या किसी अस्थायी ढांचे में।
बच्चों के लिए स्कूल भेजना चुनौती
ग्राम कटौतिया की एक अभिभावक स्कूल की स्थिति को देखकर बच्चों को भेजने से इंकार कर देती हैं। वह उल्टा सवाल करती हैं कि “हम कैसे बच्चों को स्कूल भेजें जब स्कूल खुद गिर रहे हैं?“
नटेरन तहसील के सुरई मूडरा गांव में तो पिछले 15 सालों से स्कूल भवन ही नहीं है। ग्रामीण लगातार नए भवन की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी सुनवाई नहीं हुई।
छत गिरने का डर, खौफ में पढ़ाई
विदिशा के बरखेड़ा गंभीर हाई स्कूल में छत गिरने का खतरा हमेशा बना रहता है। यहां के बच्चों को हर दिन डर के साए में पढ़ाई करनी पड़ती है।
एक शिक्षिका ने बताया, “स्कूल की स्थिति इतनी खराब है कि सभी बच्चों को एक ही कमरे में समेटकर पढ़ाना पड़ता है।“
शिक्षा विभाग को कई बार लिखा गया पत्र, लेकिन कोई समाधान नहीं
शिक्षक टीएस शर्मा ने बताया कि नए स्कूल भवन के लिए कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन सरकार से अब तक कोई स्वीकृति नहीं मिली।
गांव के स्कूल को भले ही हाई स्कूल का दर्जा मिल गया हो, लेकिन अब भी कक्षाएं प्राथमिक स्कूल भवन में ही संचालित की जा रही हैं।
विदिशा में शिक्षा व्यवस्था के भयावह आंकड़े
✅ 701 स्कूल भवन जर्जर
✅ 67 स्कूल पूरी तरह ढह चुके
✅ कई स्कूल पंचायत भवन, मंदिर, या खुले में संचालित
✅ टूटे हुए शौचालय, गिरी हुई दीवारें, खराब फर्नीचर
जिला शिक्षा अधिकारी राम कुमार ठाकुर ने बताया,
“हमने क्षतिग्रस्त स्कूलों की मरम्मत के लिए पत्र लिखा है। जिले की अधिकतर प्राथमिक शालाएं बेहद जर्जर स्थिति में हैं, इसलिए उन्हें किराए के भवनों में संचालित किया जा रहा है।”
निष्कर्ष
विदिशा में शिक्षा की बदहाल स्थिति सरकारी दावों पर सवाल खड़े करती है। क्या सरकार इन जर्जर स्कूलों के पुनर्निर्माण के लिए कोई ठोस कदम उठाएगी, या बच्चे यूं ही खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर रहेंगे?
? आपकी राय क्या है? क्या सरकार को जल्द से जल्द इन स्कूलों की मरम्मत करनी चाहिए? हमें कमेंट में बताएं!
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