खाद का काला खेल! बोलेरो में पकड़ी गई यूरिया की 80 बोरी.
Black Market of Fertilizer! 80 Sacks of Urea Seized from Bolero.
Black marketing of fertilizer exposed in Khandwa! Over 80 sacks of illegal urea were seized from a Bolero in the tribal-dominated Khalwa area. The driver failed to produce transport documents. Police and Agriculture Department have launched an investigation under the Fertilizer Control Order and Essential Commodities Act.
MP संवाद, खंडवा। खरीफ सीजन में मध्य प्रदेश में यूरिया और डीएपी खाद को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। खाद की आपूर्ति धीमी होने और मांग बढ़ने के चलते वितरण केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं। कई जिलों से खाद की बड़े स्तर पर कालाबाज़ारी की खबरें भी सामने आ रही हैं।
खंडवा से ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां आदिवासी बहुल खालवा क्षेत्र में प्रशासन ने कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है। पुलिस ने खालवा बस स्टैंड से एक बोलेरो पिकअप को रोककर उसमें से यूरिया की 80 से अधिक बोरियां बरामद की हैं। जब वाहन चालक से खाद से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, तो वह कोई भी कागजात नहीं दिखा सका।
दरअसल, खालवा इलाके में इससे पहले भी नकली खाद बेचने के मामले सामने आ चुके हैं। पुलिस ने अवैध परिवहन पर कार्रवाई जरूर की थी, लेकिन इसके बावजूद व्यापारी बेखौफ होकर लगातार सप्लाई कर रहे हैं।
बुधवार सुबह कृषि विभाग के उर्वरक गुण नियंत्रण निरीक्षक गोरेलाल वास्कले ने खालवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। उपसंचालक कृषि नितेश यादव ने बताया कि वाहन में हिंदुस्तान उर्वरक एवं रसायन लिमिटेड कंपनी की यूरिया पाई गई, जिसे बिना लाइसेंस के अवैध रूप से परिवहन किया जा रहा था।
पुलिस जांच में सामने आया कि खाद का अवैध ट्रांसपोर्ट बोरेगांव बुजुर्ग के एक व्यवसायी द्वारा किया जा रहा था, जो खुद खाद बनाता है और रात के समय किराए के वाहनों से उसे आदिवासी क्षेत्रों में पहुंचाता है। कम कीमत का लालच देकर मिलावटी खाद स्थानीय आदिवासी किसानों को बेची जाती है।
पुलिस ने बताया कि इससे पहले भी डीएपी से भरा ट्रक ज़ब्त किया गया था। इस बार जब्त वाहन के ड्राइवर की पहचान मनोज पिता गोकुल राठौर, निवासी ग्राम सारोला, तहसील पंधाना के रूप में हुई है। पूछताछ में वह किसी भी तरह का बिल या वाउचर नहीं दिखा सका। उसके खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 की धारा 7, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3(2)(a) और 7(2) के तहत केस दर्ज किया गया है।